ट्रंप ने पाकिस्तान की उम्मीदों पर फेरा पानी, ईरान डील की मध्यस्थ सूची से नाम किया आऊट (Video)

punjabkesari.in Tuesday, Aug 04, 2026 - 01:34 PM (IST)

Washington: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच पाकिस्तान को बड़ा कूटनीतिक झटका लगता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान लंबे समय से खुद को अमेरिका और ईरान के बीच संभावित मध्यस्थ के तौर पर पेश करता रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की अमेरिकी नेतृत्व से नजदीकियां भी इसी कोशिश से जोड़कर देखी जाती रही हैं। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान में पाकिस्तान का नाम नहीं आया। ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर की भूमिका का उल्लेख किया, लेकिन पाकिस्तान को इसमें शामिल नहीं किया।

 

पाकिस्तान के लिए झटका
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के अनुरोध पर बातचीत कर रहा है। इस बातचीत में सऊदी अरब, UAE और कतर की भूमिका होने की बात उन्होंने कही। ट्रंप के इस बयान को पाकिस्तान के लिए झटका इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इस्लामाबाद खुद को लंबे समय से क्षेत्रीय संकट में मध्यस्थ की भूमिका में पेश करता रहा है पाकिस्तान की कोशिश रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने में वह अपनी भौगोलिक स्थिति और दोनों पक्षों से संपर्क का इस्तेमाल करे। इस्लामाबाद के लिए यह क्षेत्रीय कूटनीति में अपनी भूमिका मजबूत करने का मौका भी हो सकता है। पाकिस्तान पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच संपर्क और बातचीत की संभावनाओं को लेकर अपनी भूमिका की पेशकश करता रहा है। लेकिन किसी भी मध्यस्थता के लिए दोनों पक्षों का भरोसा जरूरी होता है।

 

पाकिस्तान और अमेरिका के संबंधों में हाल के समय में कई उच्चस्तरीय संपर्क देखने को मिले हैं। शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की अमेरिकी नेतृत्व के साथ बातचीत तथा मुलाकातों को पाकिस्तान ने अपनी कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर पेश किया है। लेकिन ईरान के मामले में अमेरिका की प्राथमिकता फिलहाल खाड़ी के उन देशों के साथ दिखाई देती है, जिनके साथ उसके सुरक्षा और क्षेत्रीय संबंध लंबे समय से मजबूत हैं। पाकिस्तान के लिए एक और मुश्किल यह है कि वह अमेरिका और ईरान दोनों के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है। ईरान उसका पड़ोसी है, जबकि अमेरिका पाकिस्तान का महत्वपूर्ण पश्चिमी साझेदार रहा है। ऐसे में अगर इस्लामाबाद किसी एक पक्ष के बहुत करीब दिखाई देता है तो दूसरे पक्ष का भरोसा प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि ईरान-अमेरिका विवाद में पाकिस्तान के लिए संतुलन बनाना आसान नहीं है।


 
ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत को लेकर उम्मीद जताई, लेकिन साथ ही तेहरान पर दबाव भी बनाए रखा। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के पास समझौते का मौका है और सैन्य विकल्प पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत होने के दावों को खारिज किया है। ऐसे में दोनों पक्षों के बयानों में बड़ा अंतर दिखाई देता है। ट्रंप के बयान से फिलहाल इतना जरूर स्पष्ट होता है कि ईरान संकट में पाकिस्तान को वह प्रमुख भूमिका नहीं मिली, जिसकी इस्लामाबाद उम्मीद कर रहा था।  
 


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Content Writer

Tanuja

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