‘द बॉम्बे ब्लड’ की जर्मनी में स्क्रीनिंग आज, भारतीय और जर्मन सिनेमा के बीच बनेगा नया सिनेमाई पुल
punjabkesari.in Thursday, Aug 20, 2026 - 11:11 AM (IST)
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। मराठी फिल्ममेकर गौरव ठाकुर की इंटरनेशनल सर्वाइवल थ्रिलर ‘द बॉम्बे ब्लड’ भारतीय और जर्मन सिनेमा को एक साथ लाने वाली खास फिल्म बनकर सामने आई है। भारत की रचनात्मक सोच, जर्मन कलाकारों और इंटरनेशनल कहानी को जोड़ने वाली यह फिल्म आज 20 अगस्त 2026 को जर्मनी के ब्रेमेन में स्क्रीनिंग के साथ एक अहम पड़ाव पार करेगी।
फिल्म की खास बात यह है कि इसे बड़े स्टूडियो या बड़े बैनर के बजाय सीमित संसाधनों के साथ एक इंडिपेंडेंट टीम ने तैयार किया है। इसके बावजूद फिल्म को इंटरनेशनल स्तर पर शूट किया गया है और इसकी कहानी का दायरा भारत से लेकर जर्मनी तक फैला हुआ है।
ब्रेमेन में हुई फिल्म की शूटिंग
‘द बॉम्बे ब्लड’ की शूटिंग का बड़ा हिस्सा जर्मनी के ब्रेमेन में किया गया है। फिल्म में जर्मन अभिनेता डिर्क बोहलिंग, जो गोल्डन बीयर नॉमिनेटेड फिल्म ‘द गोल्डन ग्लव’ में नजर आ चुके हैं, के साथ फिलिप ओलिवर बॉमगार्टन और कैटरीन इंगेंडोह अहम भूमिकाओं में हैं।
फिल्म में मराठी अभिनेता कश्यप पारुलेकर भी मुख्य कहानी का हिस्सा हैं। फिल्म के प्रोडक्शन से नील कोठारी और डेनियल ई. पाजाक जुड़े हुए हैं।
95 फीसदी फिल्म अंग्रेजी में, मराठी भी कहानी का अहम हिस्सा
फिल्म का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा अंग्रेजी भाषा में है, लेकिन मराठी को भी कहानी में खास जगह दी गई है। फिल्म के मुख्य किरदार की पहचान और उसके भावनात्मक सफर में मराठी भाषा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
निर्देशक गौरव ठाकुर का कहना है कि फिल्म में मराठी को स्वाभाविक तरीके से किरदार की पहचान और भावनाओं से जोड़ा गया है। उनके मुताबिक, फिल्म के जरिए पहली बार मराठी भाषा को ग्लोबल सिनेमाई स्तर पर अंग्रेजी के साथ बराबरी से पेश करने की कोशिश की गई है।
क्या है ‘द बॉम्बे ब्लड’ की कहानी?
‘द बॉम्बे ब्लड’ की कहानी केशव नाम के एक भारतीय लोक कलाकार के इर्द-गिर्द घूमती है। केशव जर्मनी पहुंचता है, लेकिन वहां जाने के बाद वह अचानक एक खतरनाक वैश्विक घटना के बीच फंस जाता है।
उसका दुर्लभ Bombay Blood Group इंसानियत को बचाने की संभावित कुंजी बन जाता है। इसके बाद केशव की जिंदगी एक हाई-स्टेक इंटरनेशनल पीछा और सर्वाइवल की कहानी में बदल जाती है।
9 महीने में पूरा हुआ फिल्म का सफर
फिल्म का निर्माण करीब 9 महीनों में पूरा किया गया। इसकी शुरुआत 3 जून 2025 को हुई थी। फिल्म की शुरुआती प्रिंसिपल फोटोग्राफी पनवेल में हुई, जबकि प्रोजेक्ट का अंतिम काम 8 मार्च 2026 को पूरा हुआ।
गौरव ठाकुर के मुताबिक, सीमित संसाधनों के बावजूद टीम को भरोसा था कि इस कहानी को इंटरनेशनल कैनवास की जरूरत है। जर्मन कलाकारों के साथ काम करना और जर्मनी में शूटिंग करना उनके लिए एक खास अनुभव रहा।
20 अगस्त को जर्मनी में स्क्रीनिंग
‘द बॉम्बे ब्लड’ की जर्मनी में स्क्रीनिंग 20 अगस्त को होगी। इस मौके पर फिल्म के जर्मन कलाकार और भारतीय निर्देशक एक साथ जर्मन धरती पर मौजूद रहेंगे। ऐसे में यह स्क्रीनिंग सिर्फ फिल्म की रिलीज से जुड़ा कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत और जर्मनी के बीच सिनेमाई सहयोग का भी खास अवसर माना जा रहा है।
अब भारत में होगी फिल्म की एंट्री
जर्मनी में स्क्रीनिंग के बाद ‘द बॉम्बे ब्लड’ भारत में अपना अगला सफर शुरू करेगी। निर्देशक गौरव ठाकुर के साथ फिल्म के जर्मन कलाकार भारत आएंगे और महाराष्ट्र समेत चुनिंदा भारतीय शहरों में स्क्रीनिंग और प्रमोशनल गतिविधियों में हिस्सा लेंगे।
फिल्म को सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित न रखते हुए छोटे शहरों के दर्शकों तक भी पहुंचाने की योजना है। इस तरह ‘द बॉम्बे ब्लड’ भारतीय कहानी, मराठी भाषा और जर्मन प्रतिभा को एक इंटरनेशनल सिनेमाई मंच पर लाने की कोशिश कर रही है।
