लड़कियों शादी को जरुरत से ज्यादा रोमांटिक बनाना बंद करें, अब शादी पहले जैसे नहीं रही ...Ridhi Dogra ने लड़कियों को दी सलाह

punjabkesari.in Saturday, May 23, 2026 - 03:49 PM (IST)

Ridhi Dogra : मिस पुणे रह चुकी ट्विशा शर्मा के निधन के बाद पूरे देश में आक्रोश का माहौल है। इस दौरान हर कोई बस ट्विशा को न्याय दिलाना चाहता है। बड़े-बड़े सितारें और नेता भी  ट्विशा के समर्थन में उतरे हैं। इसी बीच एक्ट्रेस रिद्धि डोगरा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपनी कुछ राय रखी है। इसमें उन्होंने आज के लड़के-लड़कियों को सलाह दी है। 

 रिद्धि ने लिखा कि, ''युवा लड़कियों और लड़कों, यह साल 2026 है। कृपया शादी को जरूरत से ज्यादा रोमांटिक बनाना बंद करें। आपके माता-पिता का दौर और जिस माहौल में वे बड़े हुए, वह अब बदल चुका है। आज शादी पहले जैसी नहीं रही। लड़कों को समझना चाहिए कि अब लड़कियां हर बात आंख बंद करके मानने वाली नहीं हैं। क्योंकि कानूनों ने महिलाओं को मजबूत बनाया है। आज वे नौकरी कर सकती हैं, अपनी कमाई पर जी सकती हैं और समाज में सम्मान से रह सकती हैं। इसलिए अब उन्हें किसी के पीछे बिना सोचे-समझे चलने की जरूरत नहीं है। लड़कियों को अब सिर्फ जीने के लिए शादी की जरूरत नहीं। उन्हें साथ चाहिए, सहारा नहीं।

Ridhi Dogra

अगर वे प्यार के कारण शादी भी करें, तो भी उनकी पहचान और खुद की सोच बार-बार सामने आएगी। क्योंकि दुनिया बदल चुकी है और लड़कियां,यह  उम्मीद मत करो कि शादी के बादतुम्हारा बॉयफ्रेंड “राजकुमार” बन जाएगा।  वह भी इंसान है, परफेक्ट नहीं। पुरुषों को लेकर आपकी सोच उन अनुभवों से बनी है जो आपने देखे हैं लेकिन अब समाज और रिश्तों के नियम भी बदल चुके हैं। किसी फेयरी टेल जैसी शादी की उम्मीद मत रखो।

खुद को शिक्षित बनाओ। अपने लिए जियो। और अपने हक के लिए खुद खड़े होना सीखो। यह उम्मीद मत करो कि कोई और हमेशा तुम्हारे लिए आवाज उठाएगा।

शादी प्यार और सम्मान के लिए करो। उस इंसान से शादी करो जिसे तुम सच में चाहो और कृपया अपने माता-पिता को अपनी शादीशुदा जिंदगी में जरूरत से ज्यादा शामिल मत करो। अगर आप दूसरों के बिना अपनी जिंदगी नहीं जी सकते, तो वह रिश्ता सिर्फ भीड़ बनकर रह जाएगा।

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एक सम्मानजनक शादी सिर्फ दो लोगों के बीच का रिश्ता होती है।

इसी के साथ उन्होंने लिखा- “फेमिनिज्म” शब्द को आज गलत तरीके से पेश किया जाने लगा है।

लेकिन असली फेमिनिज्म सिर्फ और सिर्फ समानता है। न इससे ज्यादा, न इससे कम।

जब मैं लड़कियों के लिए बोलती हूं, तो मैं लड़कों के लिए भी आवाज उठाती हूं।मैं मानसिक स्वास्थ्य की बात करती हूं,  क्योंकि यह दोनों जेंडर के लिए जरूरी है। फेमिनिज्म कभी भी पुरुषों को दबाने के बारे में नहीं था।

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हाँ, इसकी शुरुआत तेज और गुस्से से हुई थी क्योंकि हर क्रांति की शुरुआत ऐसी ही होती है। लेकिन आज फेमिनिज्म का मतलब वैसा नहीं रह गया है। आज महिलाओं के पास अवसर हैं।समय बदल चुका है। हर उस महिला की लड़ाई, जिसने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया, आज समाज में दिखाई देती है।

 


 


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Content Editor

Prachi Sharma

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