Rajpal Yadav को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत, चेक बाउंस केस सुलझाने के लिए नियुक्त हुआ Mediator
punjabkesari.in Wednesday, Oct 21, 2026 - 06:54 PM (IST)
Rajpal Yadav Cheque Bounce Case : सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता राजपाल यादव से जुड़े चेक बाउंस विवाद को सुलझाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस नजमी वजीरी को मध्यस्थ (mediator) नियुक्त किया है। यह कानूनी विवाद 2010 के एक वित्तीय समझौते से जुड़ा है, जिसमें यादव को अपनी पहली निर्देशित फिल्म 'अता पता लापता' के लिए 'मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' से 5 करोड़ रुपये मिले थे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 2013 में, यादव ने फिल्म के लिए मिली 5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता के निपटारे के लिए 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक दिए थे।
फर्म का आरोप है कि ये चेक बाउंस हो गए
शिकायतकर्ता के अनुसार, 2012 में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें यादव, उनकी पत्नी और उनकी कंपनी ने ब्याज सहित लगभग 11 करोड़ रुपये चुकाने पर सहमति जताई थी। मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया कि अभिनेता ने कोर्ट की रजिस्ट्री में 2 करोड़ रुपये जमा किए हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा, "दोनों पक्षों की ओर से उठाए गए मुद्दों को देखते हुए, हमें लगता है कि इस मामले को मध्यस्थता (mediation) के जरिए आपसी सहमति से सुलझाया जा सकता है।
15 अक्टूबर के अपने आदेश में पीठ ने कहा, "मामले की जटिलता को देखते हुए, हम दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस नजमी वजीरी को दोनों पक्षों के बीच विवाद सुलझाने के लिए एकमात्र मध्यस्थ नियुक्त करते हैं।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को मध्यस्थ से संपर्क करने और पेश होने की तारीख तय करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि मध्यस्थ के पास यह छूट होगी कि वह दोनों पक्षों को व्यक्तिगत रूप से या ऑनलाइन पेश होने के लिए कह सकें।
कोर्ट ने कहा, "मध्यस्थ दोनों पक्षों से सलाह करके अपनी फीस खुद तय करेंगे।सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह यादव का पासपोर्ट उन्हें वापस कर दे, ताकि वे अपने पेशेवर काम जारी रख सकें। हालांकि, इसके लिए ट्रायल कोर्ट कुछ शर्तें और नियम तय कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि यादव इन शर्तों और नियमों का पालन करने के बाद ही विदेश यात्रा कर सकेंगे, और वापस लौटने पर उन्हें ट्रायल कोर्ट को सूचित करना होगा। बेंच ने कहा, "मध्यस्थता (mediation) रिपोर्ट मिलने के तुरंत बाद इस मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करें।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान, यादव के वकील ने बताया कि अभिनेता ने कोर्ट के पिछले निर्देशों का पालन करते हुए 2 करोड़ रुपये जमा कर दिए हैं। उन्होंने आग्रह किया कि चेक बाउंस होने के सात मामलों में यादव की दोषसिद्धि और तीन महीने की सजा को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई की जाए।
15 सितंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने यादव को सरेंडर करने से मिली छूट को 5 अक्टूबर तक बढ़ा दिया। 8 सितंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने यादव की याचिका पर नोटिस जारी किया और कहा कि अगर वे कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा कर देते हैं, तो उन्हें सरेंडर करने से छूट मिल जाएगी।
10 जुलाई को, दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस के कई मामलों में यादव की दोषसिद्धि को बरकरार रखा और उन्हें तीन महीने की जेल की सजा सुनाई।
हाई कोर्ट ने दोषसिद्धि के खिलाफ याचिका दायर करने में हुई 1,894 दिनों की असाधारण देरी को माफ करने से इनकार कर दिया। साथ ही, कोर्ट ने यादव को निर्देश दिया कि वे सात शिकायतों में से प्रत्येक मामले में शिकायतकर्ता को 1 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करें। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभिनेता द्वारा पहले ही जमा किए गए लगभग 2 करोड़ रुपये को इसमें समायोजित कर लिया जाएगा। साथ ही, यादव को इस फैसले के खिलाफ अपील कोर्ट में जाने का समय देने के लिए, उनकी सजा के अमल पर दो महीने के लिए रोक लगा दी।
हाई कोर्ट ने अभिनेता की पत्नी, राधा राजपाल यादव को भी आदेश दिया कि वे हर मामले में शिकायतकर्ता को लगभग 5.5 लाख रुपये का जुर्माना दें। कोर्ट ने कहा कि अगर वे जुर्माना नहीं भरती हैं, तो उन्हें तीन महीने की साधारण जेल की सजा काटनी होगी। हाई कोर्ट का यह फैसला यादव और उनकी पत्नी द्वारा दायर उन पुनरीक्षण याचिकाओं पर आया है, जिनमें उन्होंने सेशन कोर्ट के 2019 के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसने अप्रैल 2018 में चेक बाउंस के मामलों में मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा उन्हें दोषी ठहराए जाने के फैसले को बरकरार रखा था।
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अभिनेता को छह महीने की कैद की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में घटाकर तीन महीने कर दिया गया था।
