मुझे समझ ही नहीं आया क्या हो रहा था ... कैंसर की वजह से 37 की उम्र में हुआ Menopause, अब एक्ट्रेस Lisa Ray ने किये चौंकाने वाले खुलासे

punjabkesari.in Wednesday, Aug 12, 2026 - 07:33 PM (IST)

मुंबई (एजेंसी) : एक्ट्रेस लीसा रे ने कम उम्र में मेनोपॉज के अपने अनुभव और अपने शरीर पर कीमोथेरेपी के असर के बारे में खुलकर बात की है। अपनी सेहत के सफर को याद करते हुए एक्ट्रेस ने बताया कि कीमोथेरेपी के बाद 37 साल की उम्र में उन्हें मेनोपॉज का सामना करना पड़ा। 

इंस्टाग्राम पर अपनी हालिया पोस्ट में, 'फोर मोर शॉट्स प्लीज' की एक्ट्रेस ने बताया कि कीमोथेरेपी की वजह से उनका शरीर उम्मीद से पहले ही मेनोपॉज की स्थिति में पहुंच गया और उन्हें उस समय समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है। उन्होंने बताया कि कई दूसरी महिलाओं की तरह, उन्होंने भी अपनी सेहत पर पड़ने वाले असर को पूरी तरह समझने के बजाय, उन बदलावों के साथ तालमेल बिठाने में ही कई साल बिता दिए।

लीसा ने लिखा, "मैं 37 साल की उम्र में मेनोपॉज से गुजरीं। कीमोथेरेपी ने मेरे शरीर को उस पड़ाव तक पहुंचा दिया और मुझे बहुत कम समझ थी कि क्या हो रहा है। सालों तक मैंने वही किया जो बहुत सी महिलाएं करती हैं, मैंने हालात के हिसाब से खुद को ढाल लिया, मैं बस जीती रही। लेकिन जिंदा रहना और सेहतमंद रहना एक ही बात नहीं है। महिलाओं की मिडलाइफ हेल्थ के बारे में जितना ज़्यादा मैं जानती हूं, उतना ही हैरान होती हूं कि हमें अभी भी कितनी कम जानकारी है।  यह 'पेंडोरा बॉक्स' खोलने जैसा लगता है — बस फ़र्क इतना है कि इस बॉक्स को खोलने पर मुझे बहुत खुशी है

मेरे अपने अनुभव ने मुझे एक और बात सिखाई, लक्षणों का सामना करना जितना मुश्किल होता है, लगभग उतना ही मुश्किल उस बारे में चुप्पी साधे रखना भी होता है और अब जाकर हमें इसकी गंभीरता का एहसास हो रहा है। 2025 की एक भारतीय स्टडी में कम सुविधाओं वाले समुदायों की 32,000 से ज़्यादा महिलाओं का सर्वे किया गया। आधी महिलाओं को मेनोपॉज के असर के बारे में पता ही नहीं था। 62% को यह जानकारी नहीं थी कि इसका इलाज भी मौजूद है। यह चुप्पी और अपर्याप्त देखभाल की एक ऐसी समस्या है जिसके बारे में अब जाकर हम जागरूक हो रहे हैं।

'यह आपकी उम्र की वजह से है' से लेकर आइए समझते हैं कि क्या हो रहा है। 'इसके साथ जीना सीखें' से लेकर 'आइए सबूतों और आपकी अपनी हेल्थ स्टोरी पर गौर करें' तक। चुपचाप तकलीफ सहने से लेकर यह जानने तक कि कई ऑप्शन और सपोर्ट मौजूद हैं और आप दोनों की हकदार हैं।

उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, "क्योंकि महिलाएं हेल्थकेयर स्ट्रेटेजी के तौर पर सिर्फ तकलीफ सहने से कहीं ज्यादा की हकदार हैं। रिसर्च बढ़ रही है, बातचीत जोर पकड़ रही है। महिलाएं बेहतर सवाल पूछ रही हैं और मिडलाइफ़ में चुपचाप गायब होने से इनकार कर रही हैं। आपको बता दें कि 2009 में, लिसा रे को मल्टीपल मायलोमा हुआ था, जो ब्लड कैंसर का एक दुर्लभ और लाइलाज रूप है और प्लाज़्मा सेल्स को प्रभावित करता है।
 


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Content Editor

Prachi Sharma

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