Yashoda Jayanti 2026 Date and Muhurat: संतान सुख और मातृत्व कृपा पाने का विशेष पर्व है यशोदा जयंती, पढ़ें पूरी Details
punjabkesari.in Thursday, Feb 05, 2026 - 12:11 PM (IST)
Yashoda Jayanti 2026: सनातन धर्म में जब भी मां और पुत्र के निस्वार्थ प्रेम की बात होती है, तो सबसे पहले माता यशोदा और भगवान श्रीकृष्ण का नाम लिया जाता है। भले ही श्रीकृष्ण का जन्म माता देवकी के गर्भ से हुआ हो, लेकिन संसार उन्हें आज भी यशोदा के लाल के रूप में ही जानता है। माता यशोदा की ममता, त्याग और वात्सल्य को समर्पित पर्व यशोदा जयंती हर वर्ष फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है।
इस दिन माता यशोदा और बाल श्रीकृष्ण की विधिपूर्वक पूजा की जाती है और कई महिलाएं संतान सुख की प्राप्ति के लिए व्रत भी रखती हैं। आइए जानते हैं यशोदा जयंती 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व।

Yashoda Jayanti 2026 Date and Muhurat यशोदा जयंती 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार:
फाल्गुन कृष्ण षष्ठी तिथि प्रारंभ:
7 फरवरी 2026, रात 01:18 बजे
फाल्गुन कृष्ण षष्ठी तिथि समाप्त:
8 फरवरी 2026, रात 02:54 बजे
सनातन धर्म में उदयातिथि को मान्यता दी जाती है। इस नियम के अनुसार, वर्ष 2026 में यशोदा जयंती 7 फरवरी (शनिवार) को मनाई जाएगी।

Yashoda Jayanti 2026 Puja Vidhi यशोदा जयंती 2026 पूजा विधि
प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
माता यशोदा के व्रत का संकल्प लें।
घर के मंदिर में चौकी स्थापित कर उस पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।
चौकी पर माता यशोदा और बाल श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
दीपक और अगरबत्ती जलाएं।
पुष्प, तुलसी दल, चंदन, हल्दी, कुमकुम और नारियल अर्पित करें।
माता यशोदा को लाल चुनरी चढ़ाएं।
भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाएं।
फल, दही, खीर और मिठाइयों का भोग अर्पित करें।
“ॐ कृष्णाय नमः” मंत्र का जाप करें।
यशोदा-कृष्ण की वात्सल्य कथा का पाठ करें।
अंत में आरती करें और दिन भर व्रत रखें।
संध्या के समय पूजा के बाद फलाहार करें।
जरूरतमंदों को अन्न या वस्त्र का दान करें।
Religious significance of Yashoda Jayanti यशोदा जयंती का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यशोदा जयंती का व्रत विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। संतान प्राप्ति में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। विवाहित महिलाओं को संतान सुख की प्राप्ति होती है। संतान के जीवन में सुख, स्वास्थ्य और सौभाग्य बढ़ता है। मातृत्व और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है। यह पर्व मां की ममता, वात्सल्य और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक माना जाता है।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
