विश्व ब्रेल दिवस पर जानें लुई ब्रेल के संघर्ष से सफलता तक का प्रेरक सफर

punjabkesari.in Sunday, Jan 04, 2026 - 04:45 PM (IST)

World Braille Day : हर वर्ष 4 जनवरी को विश्व ब्रेल दिवस मनाया जाता है। यह दिन महान आविष्कारक लुई ब्रेल को समर्पित है, जिन्होंने दृष्टिबाधित लोगों के लिए पढ़ने-लिखने की एक अनोखी और प्रभावशाली लिपि विकसित की। ब्रेल लिपि ने दुनिया भर में लाखों नेत्रहीन और मंद दृष्टि वाले लोगों के जीवन को नई दिशा दी और उन्हें शिक्षा, आत्मनिर्भरता व स मानजनक जीवन का अवसर प्रदान किया। आज ब्रेल केवल एक लिपि नहीं बल्कि ज्ञान, समान अवसर और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम है। लुई ब्रेल का योगदान मानव इतिहास में दृष्टिबाधितों के लिए आशा और स मान का प्रतीक बन चुका है। लुई ब्रेल का जन्म 4 जनवरी, 1809 को फ्रांस के कुप्रे गांव में हुआ था। उनके पिता साइमन रेने ब्रेल पेशे से काठी और जीन बनाने का काम करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, जिसके कारण लुई बचपन से ही अपने पिता के काम में हाथ बंटाने लगे।

World Braille Day

बचपन की दुर्घटना में खोई दृष्टि
मात्र तीन वर्ष की उम्र में एक दुर्घटना के दौरान उनकी आंख में औजार लग गया, जिससे गंभीर संक्रमण फैल गया। उचित इलाज न मिल पाने के कारण कुछ ही वर्षों में उन्होंने दोनों आंखों की रोशनी खो दी और 8 वर्ष की आयु तक वह पूरी तरह दृष्टिहीन हो गए।

संघर्ष की शुरुआत
दृष्टिहीनता के बावजूद लुई ब्रेल ने शिक्षा नहीं छोड़ी। उन्होंने छात्रवृत्ति प्राप्त कर रॉयल इंस्टीच्यूट फॉर ब्लाइंड यूथ में प्रवेश लिया। वहां उन्होंने महसूस किया कि नेत्रहीनों के लिए उपलब्ध पढऩे की प्रणालियां कठिन और सीमित हैं।

कैप्टन चाल्र्स बार्बियर से प्रेरणा
विद्यालय के दिनों में लुई ब्रेल की मुलाकात सेना के कैप्टन चाल्र्स बार्बियर से हुई, जिन्होंने सैनिकों के लिए उभरे बिंदुओं पर आधारित एक गुप्त लिपि विकसित की थी, जिससे अंधेरे में भी संदेश पढ़े जा सकते थे। यही प्रणाली ब्रेल लिपि की प्रेरणा बनी।

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ब्रेल लिपि का विकास
लगभग 16 वर्ष की आयु में लुई ब्रेल ने नेत्रहीनों के लिए एक नई स्पर्शनीय लिपि पर काम शुरू किया। प्रारंभ में यह प्रणाली 12 बिंदुओं पर आधारित थी, लेकिन बाद में उन्होंने इसे सरल बनाकर छह बिंदुओं तक सीमित कर दिया। इन छह बिंदुओं के संयोजन से 64 अक्षर, सं याएं, विराम चिन्ह, गणितीय संकेत और संगीत के नोटेशन बनाए गए।

ब्रेल लिपि क्या है?
ब्रेल लिपि एक स्पर्शनीय कोड है, जिसमें उभरे हुए ङ्क्षबदुओं को उंगलियों से छूकर पढ़ा जाता है। इन ङ्क्षबदुओं के समूह को ‘सैल’ कहा जाता है। इसे उभरे कागज पर ब्रेल स्लेट, स्टायलस या ब्रेलराइटर की सहायता से लिखा जाता है और यह लगभग सभी भाषाओं में प्रयोग की जा सकती है।

प्रकाशन और जीवनकाल का संघर्ष
लुई ब्रेल ने 1824-25 में अपने कार्य को पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया और 1829 में ब्रेल लिपि प्रणाली प्रकाशित की। बाद में इसका एक परिष्कृत संस्करण भी आया। हालांकि, उनके जीवनकाल में उन्हें अपने योगदान के लिए अपेक्षित स मान नहीं मिला।

निधन के बाद मिली पहचान
6 जनवरी, 1852 को मात्र 43 वर्ष की आयु में लुई ब्रेल का निधन हो गया। उनकी मृत्यु के 16 वर्ष बाद, वर्ष 1868 में ब्रेल लिपि को आधिकारिक मान्यता प्राप्त हुई और यह धीरे-धीरे पूरी दुनिया में अपनाई गई।

ब्रेल दिवस की घोषणा
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 6 नव बर, 2018 को प्रस्ताव पारित कर 4 जनवरी को विश्व ब्रेल दिवस घोषित किया। यह दिवस पहली बार 4 जनवरी, 2019 को मनाया गया।

भारत में लुई ब्रेल का सम्मान
भारत सरकार ने लुई ब्रेल के जन्म के 200 वर्ष पूर्ण होने पर 2009 में उनके स मान में एक डाक टिकट जारी किया था।

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Content Editor

Sarita Thapa

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