Unique Holi Ritual : सावधान ! यहां होली पर बरसते हैं पत्थर, क्यों राजस्थान के इस गांव में खून बहने को माना जाता है शुभ, जानें इसकी पीछे की कहानी
punjabkesari.in Sunday, Mar 01, 2026 - 01:53 PM (IST)
Unique Holi Ritual in Rajasthan : होली का त्योहार मान्यताओं और परंपराओं का समागम है। इसे देशभर के लोग हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। इस दिन कहीं फूलों की होली होती है तो कहीं लोग एक-दूसरे पर गुलाल बरसाते हैं लेकिन क्या कभी आपने सुना है कि आग के जलते अंगारों से भी होली खेली जाती हो। इस पर यकीन कर पाना थोड़ा मुश्किल जरूर हो सकता है लेकिन देश में कई जगहों पर ऐसे ही कुछ अनोखे अंदाज में होली मनाई जाती है। आइए जानते हैं आखिर देश के किस हिस्से में मनाई जाती है ऐसी अजीबोगरीब होली।

जलते अंगारे फेंकने का चलन
सबसे पहले बात करते हैं मध्यप्रदेश के मालवा और कर्नाटक के कई इलाकों में खेली जाने वाली होली के बारे में। यहां होली के दिन एक-दूसरे पर जलते अंगारे फेंकने का चलन है। मान्यता है कि ऐसा करने से होलिका राक्षसी मर जाती है।
होली पर जीवनसाथी की तलाश
मध्यप्रदेश के भील आदिवासियों में होली के दिन जीवनसाथी से मिलने की पर परा है। यह आजाद यालों से जुड़ी होने के साथ काफी मजेदार भी है। इस दिन यहां एक हाट में बाजार लगाया जाता है। इस बाजार में लड़के-लड़कियां अपने लिए लाइफ पार्टनर तलाशने के लिए आते हैं। इसके बाद लड़के एक खास तरह का वाद्ययंत्र बजाते हुए डांस करते-करते अपनी मनपसंद लड़की को गुलाल लगा देते हैं। अगर लड़की को भी लड़का पसंद होता है तो वह भी बदले में उसको गुलाल लगाती है। दोनों की रजामंदी के बाद उनकी शादी हो जाती है।

अंगारों की राख पर चलने और पत्थरबाजी की पर परा
राजस्थान के बांसवाड़ा में रहने वाली जनजातियों के बीच खेली जाने वाली होली में गुलाल के साथ होलिका दहन की राख पर चलने की पर परा है। यहां के लोग राख के अंदर दबी आग पर चलते हैं। इसके अलावा यहां एक-दूसरे पर पत्थरबाजी करने का भी रिवाज होता है। इस प्रथा के पीछे एक मान्यता प्रचलित है कि इस होली को खेलने से जो खून निकलता है, उससे व्यक्ति का आने वाला समय बेहतर बनता है। राजस्थान में ही डूंगरपुर जिले के आदिवासी क्षेत्र भी रंग और गुलाल की जगह पत्थरों की बरसात के बीच यह पर्व मनाया जाता है। अक्सर यहां कई लोग घायल भी हो जाते हैं। डूंगरपुर के आदिवासी बहुल क्षेत्र भीलूड़ा में यह अनोखी होली खेली जाती है। रघुनाथ जी के मंदिर के समीप, ढोल-कुंडी की थाप पर ग्रामीण एकत्रित होते हैं और इसके बाद दो गुटों में बंटकर एक-दूसरे पर पत्थरों की बौछार करने लगते हैं। इस परंपरा के पीछे एक मान्यता है कि पत्थरों की चोट से निकलने वाला खून जब जमीन पर गिरता है, तो पूरे वर्ष गांव में किसी भी प्रकार की अनहोनी नहीं होती और समृद्धि बनी रहती है।
झारखंड के लोहरदगा जिले में भी होली की परंपरा निराली है। यहां इसको पत्थर मार होली के नाम से जाना जाता है। जिले के सेन्हा प्रखंड स्थित बरही गांव में यह होली काफी प्रसिद्ध है। होलिका दहन के दिन गांव के मुहाने पर स्थित माता की मंदिर के समक्ष दो झाड़ीनुमा खूंटे गाड़े जाते हैं। अरंडी और सेमर पेड़ों की डाली के खूंटे इस स्थान पर गाड़ने की परंपरा है। इसके बाद गांव के लोगों द्वारा हरी बोल के साथ खूंटा उखाड़ने के लिए दौड़ा जाता है। जो भी ग्रामीण इस झाड़ीनुमा खूंटे को उखाड़ने दौड़ते हैं, उन पर हजारों की सं या में मौजूद ग्रामीण पत्थर बरसाते हैं। जब तक खूंटा उखाड़ कर मंदिर तक लाया जाता है, तब तक ग्रामीण पत्थर चलाते रहते हैं।

होली पर मनाते हैं शोक
राजस्थान के पुष्करणा ब्राह्मण के चोवटिया जोशी जाति के लोग होली पर खुशियों की जगह शोक मनाते हैं। इस दिन घरों में चूल्हे नहीं जलते हैं। ये शोक ठीक वैसा ही होता है जैसे घर में किसी की मौत हो गई हो। ऐसा करने के पीछे एक पुरानी कहानी बताई जाती है। कहते हैं कि सालों पहले इस जनजाति की एक महिला होलिका दहन के दिन होलिका की परिक्रमा कर रही थी। उसके हाथ में उसका बच्चा भी था लेकिन बच्चा फिसलकर आग में गिर गया। उसे बचाने के लिए महिला भी आग में कूद गई।
इस तरह दोनों की मौत हो गई। मरते वक्त महिला ने वहां मौजूद लोगों से कहा कि अब होली पर कभी कोई खुशी मत मनाना। तब से यह प्रथा निभाई जा रही है। हरियाणा के कैथल जिले के दूसरपुर गांव में भी होली का त्यौहार नहीं मनाया जाता है। कहते हैं कि इस गांव को एक बाबा ने श्राप दिया था। दरअसल, संत गांव के एक व्यक्ति से नाराज हो गए थे। इसके बाद उन्होंने होलिका की आग में कूदकर जान दे दी। जलते हुए बाबा ने गांव को श्राप दिया कि अब यहां कभी होली मनाई गई तो अपशगुन होगा। इस डर से भयभीत गांव के लोगों ने सालों बीत जाने के बाद भी कभी होली नहीं मनाई
आग के बीच खेलते हैं होली
दक्षिण गोवा में पणजी से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित मल्कार्नेम गांव भी अपनी अनोखी होली के लिए जाना जाता है। यहां के लोग होली के अवसर पर जलते अंगारों के बीच उत्सव मनाते हैं। यह परंपरा सदियों पुरानी बताई जाती है और हर साल बड़ी श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाई जाती है। इस आयोजन को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं और आग के बीच खेली जाने वाली इस होली को देख हैरान रह जाते हैं।
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