कौन थे सप्तऋषि ? जानें ब्रह्मांड के सात दिव्य गुरुओं की अद्भुत कथा
punjabkesari.in Thursday, Feb 26, 2026 - 11:14 AM (IST)
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Saptarishi Katha : हिंदू धर्म में सात महान तपस्वियों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें सप्तऋषि कहा जाता है। इन्हें केवल साधु या विद्वान नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के मार्गदर्शक और मानवता के दिव्य शिक्षक के रूप में सम्मान दिया जाता है। मान्यता है कि ये ऋषि युगों-युगों तक जीवित रहते हैं और धर्म, ज्ञान तथा तप की ज्योति जलाए रखते हैं। परंपरा के अनुसार ये सात ऋषि हैं कश्यप, अत्रि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और भारद्वाज। प्राचीन ग्रंथों में वर्णन है कि इनकी उत्पत्ति ब्रह्मा के मन से हुई और सृष्टि की रचना में इन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सबसे पहले कश्यप ऋषि का नाम आता है। उन्हें देवताओं और अनेक जीवों का आदि पुरुष माना गया है। इंद्र, अग्नि और वरुण जैसे देवताओं को उनका वंशज बताया जाता है। कश्यप ऋषि ने सृष्टि के संतुलन और जीवन की निरंतरता में अहम योगदान दिया। उनका ज्ञान आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बना।
अत्रि ऋषि अपनी कठोर तपस्या और आध्यात्मिक शक्ति के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी पत्नी अनुसूया पतिव्रता और आदर्श नारी का प्रतीक मानी जाती हैं। उनके पुत्र दत्तात्रेय को त्रिदेव का अंशावतार कहा जाता है। अत्रि का जीवन त्याग, साधना और आत्मज्ञान का संदेश देता है।
वशिष्ठ मुनि का उल्लेख रामायण में प्रमुखता से मिलता है। वे अयोध्या के राजा दशरथ के कुलगुरु थे और भगवान राम के जीवन में उनका विशेष स्थान रहा। वशिष्ठ और उनकी पत्नी अरुंधति दांपत्य आदर्श के रूप में पूजित हैं। उनका जीवन यह सिखाता है कि आध्यात्मिक ज्ञान और पारिवारिक कर्तव्यों में संतुलन आवश्यक है। विश्वामित्र की कथा प्रेरणादायक है। वे प्रारंभ में एक पराक्रमी राजा थे, लेकिन कठोर तपस्या के बल पर उन्होंने ऋषित्व और ब्राह्मणत्व प्राप्त किया। गायत्री मंत्र की रचना का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है। उनका जीवन दर्शाता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प से व्यक्ति अपने जीवन की दिशा बदल सकता है।
गौतम ऋषि को धर्म और न्याय का प्रतीक माना जाता है। उनकी पत्नी अहिल्या की कथा धैर्य, प्रायश्चित और क्षमा की सीख देती है। गौतम का जीवन सत्य और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। जमदग्नि ऋषि अपने तेज और तप के लिए प्रसिद्ध थे। वे परशुराम के पिता थे। यद्यपि उनका स्वभाव कठोर बताया गया है, परंतु वे धर्म की रक्षा और नीति के पालन के लिए समर्पित थे। उनका जीवन अनुशासन और संकल्प का उदाहरण है।
अंत में भारद्वाज ऋषि का नाम आता है, जिन्हें विद्या और आयुर्वेद के क्षेत्र में अग्रणी माना जाता है। उन्होंने चिकित्सा और विज्ञान संबंधी ज्ञान को आगे बढ़ाया। उनका संदेश था कि सच्चा ज्ञान वही है, जिसे जीवन में आचरण के रूप में अपनाया जाए।
इन सातों ऋषियों की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। उनका जीवन हमें सत्य, तप, संयम और कर्तव्य की राह पर चलने की प्रेरणा देता है। यही कारण है कि हिंदू परंपरा में सप्तऋषियों को अत्यंत पूजनीय और सम्मानित स्थान प्राप्त है।
