Mahabharat Katha : द्रौपदी के अलावा भी थी युधिष्ठिर की पत्नी, जानें देविका का सच !
punjabkesari.in Monday, Feb 23, 2026 - 10:10 AM (IST)
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Mahabharat Katha : Mahabharata में Yudhishthira को धर्म, न्याय और संयम का प्रतीक माना गया है। फिर भी उनके निजी जीवन से जुड़ा एक पक्ष ऐसा है, जिस पर बहुत कम चर्चा होती है उनकी दूसरी पत्नी देविका। सार्वजनिक कथाओं में वे युधिष्ठिर के साथ कम दिखाई देती हैं। वनवास और स्वर्गारोहण जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों में भी उनका उल्लेख नहीं मिलता, जिससे उनका चरित्र रहस्यपूर्ण प्रतीत होता है।
पांडवों में ज्येष्ठ युधिष्ठिर की पत्नी के रूप में आमतौर पर Draupadi का ही नाम प्रमुखता से लिया जाता है लेकिन उनके अतिरिक्त देविका भी उनकी पत्नी थीं। देविका शिव राज्य के राजा गोवसेन की पुत्री बताई जाती हैं और एक क्षत्रिय राजकुमारी थीं। महाकाव्य में उनका उल्लेख सीमित है, इसी कारण वे कथा की पृष्ठभूमि में रह गईं।
मान्यता है कि देविका का विवाह युधिष्ठिर से वनवास से पहले हुआ था। हालांकि द्रौपदी से विवाह के बाद यह संबंध स्थापित हुआ। एक रोचक तथ्य यह भी है कि राजा द्रुपद से पहली भेंट के समय युधिष्ठिर ने स्वयं को अविवाहित बताया था, जबकि कुछ परंपराओं के अनुसार वे पहले ही देविका से विवाह कर चुके थे। विवाह के समय को लेकर विभिन्न मत मिलते हैं—कुछ कथनों में इसे युवराज बनने के बाद की घटना माना गया है, तो कुछ इसे महायुद्ध के पश्चात का प्रसंग बताते हैं।
देविका और युधिष्ठिर के पुत्र का नाम यौधेय था। जब पांडवों को 14 वर्ष का वनवास मिला, तब देविका उनके साथ वन में नहीं गईं, बल्कि माता कुंती के साथ रहीं। युद्ध के समय यौधेय ने पांडव पक्ष से युद्ध किया और वीरगति को प्राप्त हुआ।
देविका को एक पवित्र और सौम्य स्त्री के रूप में स्मरण किया जाता है। वे हस्तिनापुर और इंद्रप्रस्थ में युधिष्ठिर के साथ रहीं, जहां उनके प्रति सम्मान और स्नेह का भाव था। कुछ मान्यताओं में उन्हें यमधर्म की पत्नी उर्मिला का अवतार भी कहा गया है और वे कृष्णा की भक्त मानी जाती हैं।
महाभारत के आदिपर्व में देविका का संक्षिप्त उल्लेख मिलता है। उनका व्यक्तित्व महत्वपूर्ण होने के बावजूद द्रौपदी की व्यापक कथा के कारण कम उजागर हुआ। फिर भी कहा जाता है कि उनके द्रौपदी के साथ संबंध सौहार्दपूर्ण थे और पांडव भी उनका सम्मान करते थे।
जहां तक उनके अंत का प्रश्न है, ग्रंथों में स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है। कुछ मान्यताओं के अनुसार युधिष्ठिर की अंतिम हिमालय यात्रा के आसपास उनका निधन हुआ, जबकि अन्य कथाएं इसे बाद की घटना मानती हैं। इस प्रकार देविका का जीवन महाभारत का एक शांत, किंतु रोचक और रहस्यमय अध्याय बना रहता है।
