भाई दूज पर क्यों लगाया जाता है भाई को तिलक? जानें यमराज और यमुना की रोचक कथा
punjabkesari.in Sunday, Nov 01, 2026 - 01:21 PM (IST)
Why Tilak Applied On Bhai Dooj : सनातन धर्म में भाई दूज का त्योहार भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। दीपावली के दो दिन बाद मानाया जाने वाला यह पर्व हर भाई-बहन के लिए बहुत खास होता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र, अच्छी सेहत और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं। वहीं, भाई अपनी बहनों को उपहार देकर उनकी रक्षा और साथ निभाने का वचन देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भाई दूज पर तिलक लगाने की परंपरा आखिर कैसे शुरू हुई। इसके पीछे मृत्यु के देवता यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ी एक बहुत रोचक कथा प्रचलित है। तो आइए जानते हैं भाई दूज की यह कथा और इस दिन तिलक लगाने के क महत्व के बारे में-
भाई दूज पर क्यों लगाया जाता है भाई को तिलक?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाई दूज के दिन बहन द्वारा भाई के माथे पर तिलक लगाने की परंपरा का संबंध यमराज और यमुना से है। कहा जाता है कि इस दिन बहन अपने भाई को तिलक लगाकर उसके सुखी जीवन, लंबी आयु और समृद्धि की प्रार्थना करती है। मान्यता है कि भाई दूज पर बहन के हाथों तिलक करवाने और उसके घर भोजन करने से भाई को यमराज का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी वजह से इस पर्व को यम द्वितीया भी कहा जाता है। इस दिन भाई-बहन एक-दूसरे के प्रति अपने प्रेम और जिम्मेदारी को भी प्रकट करते हैं।

क्या है यमराज और यमुना की पौराणिक कथा?
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान सूर्यदेव और माता संज्ञा के दो संतानें थीं, जिनका नाम यमराज और यमुना था। दोनों भाई-बहन एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे। यमुना अपने भाई यमराज से बेहद स्नेह रखती थीं और कई बार उन्हें अपने घर आने का निमंत्रण देती थीं। लेकिन अपने कार्यों में व्यस्त रहने के कारण यमराज बहन के घर नहीं जा पाते थे। एक दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने पहुंचे। भाई को घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने यमराज का आदर-सत्कार किया, उनके माथे पर तिलक लगाया और स्वादिष्ट भोजन परोसा। बहन के इस प्रेम और सम्मान से यमराज बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने यमुना से कोई वरदान मांगने के लिए कहा। तब यमुना ने अपने भाई से कहा कि हर साल इस दिन वह उनसे मिलने आया करें और जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर उससे तिलक करवाए, उसे सुख-समृद्धि और लंबी आयु का आशीर्वाद मिले। यमराज ने अपनी बहन की यह इच्छा स्वीकार कर ली। उन्होंने यह भी वरदान दिया कि इस दिन जो भाई अपनी बहन से तिलक करवाएगा और उसके घर भोजन करेगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। तभी से कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भाई दूज मनाने की परंपरा शुरू हुई।

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