अहोई अष्टमी की रात राधा कुंड में क्यों किया जाता है स्नान? जानें इससे जुड़ी खास मान्यता और पौराणिक कथा

punjabkesari.in Sunday, Nov 01, 2026 - 09:26 AM (IST)

Radha Kund Snan Ahoi Ashtami : मथुरा की धार्मिक पहचान भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े मंदिरों और तीर्थस्थलों के कारण दुनियाभर में है। यहां एक ऐसा पवित्र कुंड भी है, जिसे संतान सुख की कामना करने वाले दंपतियों के लिए विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि अहोई अष्टमी की मध्यरात्रि में इस कुंड में स्नान करने से नि:संतान दंपतियों की मनोकामना पूरी होती है। यही वजह है कि इस खास अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। यह राधा कुंड के नाम से प्रसिद्ध है। यहां स्नान की परम्परा केवल संतान कामना करने वाले दंपतियों तक सीमित नहीं है। जिन दंपतियों की मनोकामना पूरी हो जाती है, वे अपने बच्चों के साथ दोबारा राधा कुंड पहुंचते हैं। यहां वे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं और बच्चों का मुंडन संस्कार भी कराते हैं।

Radha Kund Snan Ahoi Ashtami

राधा कुंड और श्याम कुंड की पौराणिक कथा
राधा कुंड और श्याम कुंड के निर्माण के पीछे एक प्रचलित पौराणिक कथा है। मान्यता के अनुसार, प्राचीन समय में इस स्थान को अरिष्ट वन के नाम से जाना जाता था। यहां अरिष्टासुर नामक एक शक्तिशाली राक्षस रहता था। कहा जाता है कि उसने गाय के बछड़े का रूप धारण कर भगवान श्रीकृष्ण पर हमला किया था। भगवान कृष्ण ने उसका वध कर दिया। इसके बाद राधा जी ने उनसे कहा कि उन्होंने गोवंश से जुड़े प्राणी का वध किया है, इसलिए उन्हें पाप से मुक्ति के लिए सभी पवित्र तीर्थों में स्नान करना चाहिए। इस पर भगवान कृष्ण ने अपनी एड़ी से भूमि पर प्रहार किया और वहां एक कुंड का निर्माण हुआ। मान्यता है कि उसमें सभी तीर्थों का जल आकर मिल गया। इसे श्याम कुंड कहा गया। इसके बाद राधा जी और उनकी सखियों ने अपनी चूडिय़ों से भूमि खोदकर एक अन्य कुंड बनाया। उसमें भी सभी तीर्थों का जल समाहित हुआ। यह कुंड राधा कुंड कहलाया। तभी से दोनों कुंडों को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। अहोई अष्टमी की मध्यरात्रि में यहां स्नान करने की परम्परा भी इसी कथा और आस्था से जुड़ी मानी जाती है।

Radha Kund Snan Ahoi Ashtami

यूं पहुंचें
मथुरा जिले के गोवर्धन क्षेत्र में स्थित श्याम व राधा कुंड तक रेल, सड़क और हवाई मार्ग से पहुंचा जा सकता है। निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन मथुरा जंक्शन है, जो यहां से लगभग 26 किलोमीटर दूर है। स्टेशन से गोवर्धन के लिए टैक्सी, ऑटो या बस मिल जाती है। दिल्ली और आसपास के शहरों से मथुरा या गोवर्धन के लिए बस और टैक्सी की सुविधा उपलब्ध है। दिल्ली से मथुरा की दूरी लगभग 160 किलोमीटर है।

Radha Kund Snan Ahoi Ashtami

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Content Editor

Sarita Thapa

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