Karwa Mata Story: क्या आप जानते हैं करवा चौथ का नाम 'करवा' क्यों पड़ा? जानिए मृत्यु के मुंह से सुहाग खींच लाने वाली पतिव्रता की गाथा
punjabkesari.in Tuesday, Oct 27, 2026 - 12:38 PM (IST)
Karwa Chauth 2026: अखंड सुहाग देने वाला करवाचौथ का व्रत अन्य सभी व्रतों से कठिन है क्योंकि इस दिन महिलाएं दिनभर निर्जल रहने के बाद रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही भोजन करती हैं। करवा चौथ मूलत: देवी गौरी के करवा स्वरूप को समर्पित है। दीवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा चित्रित कर "वर" बनाते हैं। पीली मिट्टी से गौरी व उनकी गोद में गणेश जी बनाकर बिठाए जाते हैं। गौरी का पूजन कर उन्हे 16 श्रृंगार चढ़ाए जाते हैं। रोली से करवा पर स्वस्तिक बनाते हैं। करवा पर 13 बिंदी रखकर 13 चावल के दाने हाथ में लेकर करवा चौथ की कथा कही जाती है। पूजा के बाद मिट्टी के करवे में चावल, उड़द व सुहाग की सामग्री का दान किया जाता है। सास के पांव छूकर फल, मेवा व सुहाग की सारी सामग्री उन्हें दी जाती है। रात्रि में चंद्रोदय के उपरांत छलनी की ओट से चंद्र दर्शन कर अर्घ्य देकर जीवनसाथी के दर्शन करने के बाद ही दंपत्ति अन्न-जल ग्रहण करते हैं। करवा चौथ के विशेष पूजन, व्रत और उपाय से जीवनसाथी को अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है, माता गौरी से अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है, सुहाग की रक्षा होती है तथा सुंदरता और आकर्षण में वृद्धि होती है। इस बीच दोपहर बाद करवाचौथ की पौराणिक कथा सुनती हैं जो कुछ इस प्रकार है:

करवा माता की कथा
कथा के अनुसार, प्राचीन काल में करवा नाम की एक पतिव्रता महिला रहती थीं। एक दिन उनके पति नदी में स्नान करने गए, जहां एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया और पानी में खींचने लगा। संकट में फंसे पति ने अपनी पत्नी करवा को पुकारा। पति की आवाज सुनते ही करवा दौड़कर नदी किनारे पहुंचीं। उन्होंने अपने तपोबल और सतीत्व के प्रभाव से मगरमच्छ को एक सूती धागे से बांध दिया।
इसके बाद वे अपने पति और बंधे हुए मगरमच्छ को लेकर सीधे यमराज के पास पहुंच गईं। करवा ने यमराज से अपने पति को जीवनदान देने और मगरमच्छ को दंडित करने की प्रार्थना की। करवा के इस अदम्य साहस और पतिव्रत धर्म को देखकर यमराज और चित्रगुप्त अत्यंत प्रभावित हुए।
उन्होंने करवा के पति को लंबी उम्र का वरदान प्रदान किया। तभी से यह परंपरा शुरू हुई कि जो महिलाएं कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को श्रद्धापूर्वक करवा चौथ का व्रत रखकर करवा माता का पूजन करेंगी, उनके सुहाग की सदैव रक्षा होगी और वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा।
करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। वर्ष 2026 में चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 29 अक्टूबर 2026 की रात 1 बजकर 06 मिनट पर होगा और समापन 29 अक्टूबर 2026 की रात 10 बजकर 09 मिनट पर।
करवा चौथ चंद्रोदय का समय
29 अक्टूबर 2026 की रात लगभग 8 बजकर 17 मिनट (8:17 PM) पर चंद्रमा के दर्शन होंगे। अलग-अलग शहरों और स्थानों के अनुसार चांद निकलने के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद सुहागिनें पति के हाथों जल पीकर अपना व्रत खोलेंगी।

करवा चौथ आरती
ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया.. ओम जय करवा मैया।
सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी।
यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी.. ओम जय करवा मैया।
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती।
दीर्घायु पति होवे , दुख सारे हरती.. ओम जय करवा मैया।
होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे।
गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे.. ओम जय करवा मैया।
करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे।
व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे.. ओम जय करवा मैया।
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Content Writer
Niyati Bhandari