Mata Shabari Story : आखिर क्यों माता शबरी को था श्रीराम के आने का पूरा विश्वास? गुरु मतंग ऋषि से जुड़ा है यह रहस्य
punjabkesari.in Tuesday, Oct 20, 2026 - 11:45 AM (IST)
Mata Shabari Story : रामायण को हिंदू धर्म के प्राचीन ग्रंथों में से माना गया है। रामायण में कई प्रकार के अलग-अलग प्रसंग मिलते हैं जिनमें से एक ऐसा विशेष प्रसंग मिलता है जो एक भक्त की अपने भगवान के प्रति अटूट भक्ति को दर्शाता है। हम बात करें माता शबरी और भगवान राम की कथा के बारे में। भगवान श्रीराम और माता शबरी की भक्ति से जुड़ी कथा बेहद भावपूर्ण और प्रेरणादायक मानी जाती है। शबरी एक ऐसी भक्त थीं, जिन्हें पूरा विश्वास था कि एक दिन भगवान श्रीराम स्वयं उनसे मिलने जरूर आएंगे। इसी विश्वास के साथ वह वर्षों तक प्रभु श्रीराम की प्रतीक्षा करती रहीं। मान्यता है कि उनके मन में अपने आराध्य के प्रति इतना अटूट प्रेम और समर्पण था कि हर दिन उन्हें श्रीराम के आगमन की आशा बनी रही थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर माता शबरी को कैसे पता थी कि भगवान राम एक दिन उनसे मिलने जरूर आएंगे। उनके मन में प्रभु के आगमन को लेकर इतना अटूट विश्वास कैसे जागा और किसके वचन पर भरोसा करके वह वर्षों तक श्रीराम की राह देखती रहीं। तो आइए जानते हैं इस कहानी के बारे में विस्तार से।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता शबरी ने अपना सारा जीवन गुरु मतंग ऋषि की सेवा करते हुए समर्पित कर दिया था। वह प्रतिदिन आश्रम के कार्यों में सहायता करती थी और पूरी श्रद्धा के साथ अपने दिन रात अपने गुरु की सेवा करती थी। उनके इसी निर्मल और सरल स्वभाव के मतंग ऋषि बेहद ही प्रसन्न थे और उन्होंने माता शबरी को भगवान राम की भक्ति का मार्ग दिखाया था। कहा जाता है कि जब मतंग ऋषि अपनी अंतिम सांसें ले रहे थे तब उन्होंने माता शबरी से कहा था कि एक दिन भगवान श्रीराम उनसे मिलने ज़रूर आएंगे और तुम उनकी प्रतिक्षा करना। अपने गुरु के वचनों को सत्य मानते हुए शबरी के मन में प्रभु के आगमन की अटूट आशा जग गई। मतंग ऋषि के जाने के बाद भी माता शबरी ने आश्रम ने छोड़ा और प्रतिदिन श्रीराम के आने की प्रतीक्षा करने लगीं। उन्हें पूरा विश्वास था कि उनके गुरु का वचन अवश्य सत्य होगा और एक दिन प्रभु उनके आश्रम में जरूर पधारेंगे।
ऐसे ही समय बीतता गया लेकिन माता शबरी की आस्था और विश्वास में कभी भी कमी नहीं आई। इसी आशा में कि भगवान राम आज आएंगे वह सुबह उठकर आश्रम के रास्ते को साफ करतीं, रास्ते में पड़े कंकड़-पत्थर हटातीं और प्रभु के स्वागत की तैयारी करती थीं। उनकी दिनचर्या का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा श्रीराम के आगमन की प्रतीक्षा करना था। कथाओं के अनुसार, जब श्रीराम माता सीता की खोज करते हुए अपने भाई लक्ष्मण जी के साथ वन में पहुंचे, तब वह माता शबरी के आश्रम में भी आए। माता शबरी ने जब अपने प्रभु श्रीराम को अपने सामने देखा तो उन्हें नेत्र सजल हो गए और उनकी प्रसन्नता का कोई ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने अत्यंत प्रेम और श्रद्धा के साथ भगवान श्रीराम और लक्ष्मण जी का स्वागत किया। उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे और हृदय प्रभु के दर्शन से भाव-विभोर हो उठा था। उनके लिए यह केवल किसी अतिथि का आगमन नहीं, बल्कि जीवन भर की साधना और विश्वास के पूर्ण होने का क्षण था।
माता शबरी और भगवान श्रीराम की कथा में बेर का प्रसंग विशेष रूप से प्रसिद्ध माना गया है। कथाओं के अनुसार शबरी ने प्रभु को बेर अर्पित किए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि फल मीठे हों, उन्होंने पहले उन्हें चखकर देखा। इसके बाद वे बेर भगवान श्रीराम को प्रेमपूर्वक खिलाने लगीं और भगवान राम ने भी उन बेरों को ग्रहण किया था। इस प्रसंग को भक्ति साहित्य में भक्त के निष्कपट प्रेम और समर्पण के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
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