Radha Ashtami 2026 : दोपहर में ही क्यों होती है राधा रानी की पूजा, जानें राधा अष्टमी की इस परंपरा का कारण

punjabkesari.in Thursday, Sep 17, 2026 - 10:03 AM (IST)

Why Radha Rani Worshipped At Afternoon : हिंदू धर्म में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का बहुत खास महत्व है। इस दिन ब्रज की अधिष्ठात्री देवी और भगवान श्री कृष्ण की आह्लादिनी शक्ति श्री राधा रानी का प्राकट्य उत्सव बड़े ही धूमधाम और उत्सह के साथ मनाया जाता है। इस साल का राधा अष्टमी का व्रत 19 सितंबर, 2026 शनिवार के दिन रखा जाएगा। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से राधा रानी की पूजा करने और व्रत रखने से दांपत्य जीवन में मधुरता और प्यार बना रहता है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। अक्सर आपने देखा  होगा कि अधिकांश देवी-देवताओं की पूजा या जन्मोत्सव प्रातःकाल या मध्यरात्रि में मनाया जाता है, लेकिन राधा रानी की मुख्य पूजा का समय हमेशा दोपहर का रखास जाता है। आखिर क्या है इसके पीछे का पौराणिक और धार्मिक रहस्य। तो आइए जानते हैं विस्तार से इसके बारे में-

अभिजीत मुहूर्त का अलौकिक संयोग
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दोपहर 12 बजे के समय बरसाना में राजा वृषभानु और माता कीर्ति के यहां श्री राधा रानी का जन्म हुआ था। शास्त्रों में दोपहर के समय आने वाले अभितीज मुहूर्त को  सबसे पवित्र और दोषमुक्त माना गया है। इसी अलौकिक समय पर देवी राधा का आगमन हुआ था, इसीलिए आज भी मंदिरों और घरों में ठीक दोपहर 12 बजे राधा रानी का अभिषेक, भव्य आरती और जन्मोत्सव मनाया जाता है।

सूर्य देव और अनुराधा नक्षत्र का विशेष संबंध
पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा वृषभानु को श्री राधा रानी एक दिव्य कमल के फूल पर तैरती हुई मिली थीं। उस समय दोपहर की सूर्य की किरणें सीधी उस कमल के पुष्प और बाल राधा पर पड़ रही थीं। माना जाता है कि सूर्य देव ने भगवान श्री कृष्ण और राधा जी के दर्शन करने के लिए हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की थी।जब राधा रानी का प्राकट्य हुआ, तब सूर्य देव को मध्याह्न कालमें उनके प्रत्यक्ष दर्शन का सौभाग्य मिला। यही कारण है कि सूर्य के पूर्ण प्रभाव वाले दोपहर के समय ही श्री राधा की आराधना करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Sarita Thapa

Related News