Why Radha Ashtami After Janmashtami : कृष्ण जन्माष्टमी के 15 दिन बाद क्यों मनाई जाती है राधा अष्टमी? जानें क्या है धार्मिक कारण
punjabkesari.in Wednesday, Sep 16, 2026 - 11:39 AM (IST)
Why Radha Ashtami After Janmashtami : हिंदू धर्म में भाद्रपद का महीना बहुत पवित्र और फलदायी माना जाता है। इस माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जहां पूरे देश में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, ठीक उसके 15 दिन बाद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का पर्व मनाई जाती है। इस साल राधा अष्टमी का पर्व 19 सितंबर, 2026 को है। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन और पूरे विधि-विधान के साथ राधा- कृष्ण की पूजा करने और व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में मधुरता और खुशहाली बनी रहती है और मन की हर मुराद पूरी होती है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल बना रहता है कि कृष्ण जन्माष्टमी के 15 दिन बाद ही क्यों मनाई जाती है राधा अष्टमी। तो आइए जानते हैं इससे जुड़े धार्मिक कारण के बारे में-
भाद्रपद माह के दोनों पक्षों का विशेष योग
धार्मिक मान्यताओं और पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आधी रात में मनाई जाती है। वहीं, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दोपहर में मनाई जाती है। शास्त्रों में कृष्ण पक्ष को भगवान श्री कृष्ण का स्वरूप और शुक्ल पक्ष को श्री राधा रानी का स्वरूप माना गया है। जैसे चंद्रमा के दोनों पक्षों के बिना महीना पूरा नहीं होता, ठीक वैसे ही श्री कृष्ण की पूजा भी राधा जी के बिना अधूरी मानी जाती है।
राधा के बिना अधूरे हैं कृष्ण - आध्यात्मिक कारण
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, श्री कृष्ण और राधा रानी दो अलग-अलग सत्ताएं नहीं, बल्कि एक ही आत्मा के दो रूप हैं। भगवान श्री कृष्ण स्वयं कहते हैं कि जो व्यक्ति केवल उनका नाम जपता है लेकिन राधा रानी का स्मरण नहीं करता, उसकी पूजा वे स्वीकार नहीं करते। कृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान विष्णु के 8वें अवतार के रूप में श्री कृष्ण आए। इसके ठीक 15 दिन बाद शुक्ल पक्ष की 8वीं तिथि को श्री राधा रानी का प्राकट्य हुआ। यह तिथि दर्शाती है कि दोनों का संबंध अटूट और समान है।
