Balram Jayanti 2026: बलराम जयंती आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, क्यों कहलाते हैं हलधर और जन्म का पौराणिक रहस्य

punjabkesari.in Wednesday, Sep 16, 2026 - 08:59 AM (IST)

Balram Jayanti 2026: हिंदू धर्म में भाद्रपद माह की षष्ठी तिथि का विशेष आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इस पावन अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम का जन्मोत्सव देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस पर्व को हल षष्ठी, बलदेव छठ, ललही छठ और बलभद्र जयंती के नाम से भी जाना जाता है। यह पावन दिन शक्ति, संयम और हमारी कृषि संस्कृति के प्रति विशेष सम्मान प्रकट करने का महापर्व है।

Balram Jayanti 2026

बलराम जयंती 2026: तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त
भगवान बलराम की जन्मतिथि को लेकर धार्मिक ग्रंथों और विद्वानों के बीच अलग-अलग मान्यताएं देखने को मिलती हैं। एक परंपरा के अनुसार, उनका जन्म हल षष्ठी के दिन हुआ था, जिस वजह से श्रद्धालु हल षष्ठी को ही बलराम जयंती के रूप में मनाते हैं। वहीं गर्ग संहिता के अनुसार, भगवान बलराम का प्राकट्य भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को हुआ था। तिथि गणना के अनुसार, यह षष्ठी तिथि 16 सितंबर को सुबह 8:59 बजे शुरू होकर 17 सितंबर को सुबह 10:47 बजे समाप्त होगी। इसलिए 16 सितंबर (बुधवार) को बलराम जयंती का पर्व मनाया जा रहा है।

Balram Jayanti 2026

बलराम जी क्यों कहलाते हैं हलधर, जानें जन्म का पौराणिक रहस्य 
बलराम जी जिन्हें बलदेव या हलधर भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म के प्रमुख देवता और भगवान कृष्ण के बड़े भाई हैं। बलराम जी को विशेष रूप से उनकी बलशाली और पराक्रमी प्रवृत्तियों के लिए जाना जाता है। वे हल (हलधर) और मूसल (मूसलधर) के रूप में कृषक कार्यों से जुड़े रहे हैं। बलराम जी को कृषि और खेतिहर जीवन का देवता माना जाता है। उन्होंने कृषि की कला को विकसित किया और खेती के उपकरण जैसे हल और मूसल को लोकप्रिय बनाया।

भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म एक दिव्य संरचना से हुआ था। जो हिन्दू धर्म के महाकाव्य भागवत पुराण और अन्य ग्रंथों में वर्णित है। बलराम जी का जन्म कंस के अत्याचारों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण अध्याय है। कंस यादव वंश के राजा उग्रसेन का पुत्र था। उसने अपनी बहन देवकी के पुत्र भगवान कृष्ण के जन्म की भविष्यवाणी के बाद उसे जेल में डाल दिया था। कंस को आकाशवाणी हुई थी कि देवकी का आठवां पुत्र उसकी मृत्यु का कारण बनेगा। इस भय से कंस ने देवकी और उनके पति वासुदेव को बंदी बना लिया और उनके सभी बच्चों की हत्या करने का आदेश दिया।

जब कंस ने देवकी के 6 पुत्रों की हत्या कर दी तब सातवें गर्भ की अवस्था में बलराम जी को भगवान विष्णु की माया ने उनके गर्भ से निकाल कर रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया। रोहिणी वासुदेव की पहली पत्नी थी और बलराम जी को उन्होंने अपने पुत्र के रूप में पाला। देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान के रुप में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ।

बलराम जी ने कृष्ण के साथ मिलकर धर्म की रक्षा और अधर्म का नाश करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बलराम जी का जन्म और जीवन उनकी शक्ति, धैर्य और कृषक के रूप में उनके कार्यों के लिए प्रसिद्ध है। उनके भक्त उन्हें बल, साहस और समृद्धि के देवता मानते हैं।

Balram Jayanti 2026

आज के दिन क्या करें 
हल चले धरती का अन्न व शाक भाजी अवश्य खाएं।
 
गाय के दूध से बना कोई भी पदार्थ न खाएं।
 
शिव परिवार और नाव का पूजन करें।
 
इस तरह करने से संतानहीन महिलाओं को श्रेष्ठ संतान की प्राप्ति होती है। संतानवान माताओं की संतान की उम्र आरोग्य एवं वैभव में बढ़ौतरी होती है।

Balram Jayanti 2026

बलराम जयंती पर कैसे करें पूजा-अर्चना?
प्रतिमा स्थापना व पूजन: पूजा स्थल पर भगवान बलराम की प्रतिमा या चित्र स्थापित करके उन्हें जल, पुष्प, फल और नैवेद्य अर्पित करें।
श्रीकृष्ण का स्मरण: इस दिन भगवान बलराम के साथ भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण व पूजन करना विशेष फलदायी माना जाता है।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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