दिवाली की पूजा के बाद भी क्यों जलता रहना चाहिए दीपक, मां लक्ष्मी के आगमन से जुड़ा है खास धार्मिक रहस्य
punjabkesari.in Saturday, Nov 07, 2026 - 01:19 PM (IST)
Why Keep Diya Lit After Diwali Puja : सनातन धर्म में दिवाली का त्योहार बहुत खास माना जाता है। हर साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर दीपावली का पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, रंगोली बनाते हैं और शाम के समय मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करते हैं। दिवाली पर दीपक जलाने की परंपरा भी सदियों पुरानी है। माना जाता है कि दीपों की रोशनी से घर का अंधकार दूर होता है और खुशहाली का आगमन होता है। मान्यता है कि दीपों की रोशनी से घर का अंधकार दूर होता है और खुशहाली का आगमन होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिवाली की रात पूजा के बाद भी दीपक जलाकर रखने की परंपरा क्यों है? तो आइए जानते हैं कि इससे जुड़ी मान्यताएं के बारे में-
दिवाली की रात अखंड ज्योति जलाने का क्या है महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक को प्रकाश, ज्ञान और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। दिवाली की रात अखंड ज्योति जलाने का अर्थ है कि घर में शुभता और उजाले का प्रवाह लगातार बना रहे। मान्यता है कि जिस घर में दीपावली की रात दीपक जलता रहता है, वहां मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। अखंड ज्योति जलाने की परंपरा केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं, बल्कि अंधकार पर प्रकाश की जीत के संदेश से भी जुड़ी हुई है। यह दीपक हमें जीवन में उम्मीद, विश्वास और सकारात्मक सोच बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

मां लक्ष्मी के आगमन से जुड़ी है यह मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की अमावस्या की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। ऐसा कहा जाता है कि माता उन घरों में प्रवेश करती हैं, जहां स्वच्छता, रोशनी और सकारात्मक वातावरण होता है। इसी वजह से लोग दिवाली पर अपने घर के हर कोने को दीपों से सजाते हैं। मान्यता है कि रातभर दीपक जलाए रखने से घर में शुभ ऊर्जा बनी रहती है और मां लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है। यही कारण है कि कई परिवारों में पूजा के बाद भी दीपक जलता रहने दिया जाता है।

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