दिवाली पर रंगोली और स्वस्तिक बनाने की परंपरा क्यों है खास? जानें इसके पीछे का धार्मिक महत्व

punjabkesari.in Friday, Nov 06, 2026 - 10:12 AM (IST)

Why Make Rangoli and Swastika in diwali : हिंदू धर्म में दिवाली के त्योहार को बहुत खास  माना जाता है। दिवाली के त्योहार आते ही हर तरफ खुशियों और उत्साह का माहौल देखने को मिलता है। लोग अपने घरों की  साफ-सफाई करने के साथ-साथ उन्हें दीपों, फूलों, बंदनवार और रंग-बिरंगी सजावट से सजाते हैं। इस दिन घर के आंगन में खूबसूरत रंगोली बनाई जाती है और मुख्य द्वार पर स्वस्तिक का चिह्र भी बनाया जाता है। सनातन धर्म में इन दोनों शुभ चिह्रों का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि रंगोली और स्वास्तिक केवल घर की  सुंदरता बढ़ाने के लिए नहीं बनाए जाते, बल्कि इन्हें सुख-समृद्धि, शुभता और सकारात्मकता का प्रतीक भी माना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दिवाली पर रंगोली और स्वस्तिक बनाने क्यों शुभ माना जाता है। तो आइए जानते हैं इनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं महत्व के बारे में-

Why Make Rangoli and Swastika in diwali

दिवाली पर रंगोली बनाने का क्या है धार्मिक महत्व?

भारतीय संस्कृति में रंगोली बनाने की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है। किसी भी शुभ अवसर, त्योहार, पूजा-पाठ या मांगलिक कार्यक्रम के दौरान घर के आंगन और प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाने का विशेष महत्व होता है। इसे घर की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ शुभता और अतिथि सत्कार का प्रतीक भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की रात माता लक्ष्मी अपने भक्तों के घरों में पधारती हैं। ऐसे में लोग देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए अपने घरों को साफ-सुथरा रखते हैं और मुख्य द्वार पर सुंदर रंगोली बनाते हैं। मान्यता है कि रंगोली से सजा हुआ घर मां लक्ष्मी के स्वागत और सुख-समृद्धि की कामना का प्रतीक होता है। रंगोली में कमल का फूल, दीपक, शंख, कलश और फूलों की आकृतियां बनाना बेहद शुभ माना जाता है। खासतौर पर कमल का फूल माता लक्ष्मी से जुड़ा हुआ है। वहीं दीपक की आकृति अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देती है।

 Why Make Rangoli and Swastika in diwali

स्वस्तिक बनाने के पीछे क्या है मान्यता?

हिंदू धर्म में स्वस्तिक को अत्यंत शुभ और पवित्र चिह्न माना गया है। किसी भी नए काम की शुरुआत हो या घर में कोई धार्मिक आयोजन, स्वस्तिक बनाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। दिवाली पर भी लोग घर के मुख्य दरवाजे, मंदिर, पूजा की चौकी और तिजोरी पर स्वस्तिक बनाते हैं। स्वस्तिक शब्द का संबंध संस्कृत के 'सु' और 'अस्ति' शब्दों से माना जाता है, जिसका भावार्थ कल्याण और मंगल से जुड़ा है। इसे सुख, शांति, समृद्धि और शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्वस्तिक की चार भुजाएं जीवन के चार पुरुषार्थों यानी धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का संकेत देती हैं। इसके अलावा इन्हें चार दिशाओं और चार वेदों से भी जोड़कर देखा जाता है। दिवाली के अवसर पर स्वस्तिक बनाने के पीछे परिवार की खुशहाली, घर में सुख-शांति और जीवन में उन्नति की कामना छिपी होती है। इसे भगवान गणेश से भी जोड़ा जाता है, क्योंकि गणेश जी को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों का आरंभ करने वाला देवता माना जाता है।

Why Make Rangoli and Swastika in diwali

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Content Editor

Sarita Thapa

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