दिवाली पर अमावस्या की रात ही क्यों जलाए जाते हैं दीपक? जानें सदियों पुरानी पौराणिक कथा

punjabkesari.in Wednesday, Nov 04, 2026 - 12:44 PM (IST)

Why Light Diyas On Diwali Amavasya : दिवाली हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख और लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। यह पर्व हर साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। दीपों का यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस दिन घरों, मंदिरों  और गलियों में दीपक जलाए जाते हैं और मां लक्ष्मी तथा भागवान गणेश पूजा की जाती है। लेकिन क्या  आप जानते हैं कि दिवाली मनाने की परंपरा के पीछे कौन सी पौराणिक कथा प्रचलित है और अमावस्या की अंधेरी रात में दीपक जलाने का क्या महत्व है। तो आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से। 

Why Light Diyas On Diwali Amavasya

अमावस्या की रात क्यों जलाए जाते हैं दीपक?

कार्तिक अमावस्या की रात चंद्रमा दिखाई नहीं देता, जिससे चारों ओर अंधकार रहता है। ऐसे में दीपक जलाना प्रकाश और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक की रोशनी घर से नकारात्मकता दूर करती है और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है। दिवाली की रात दीप जलाने का एक विशेष संबंध मां लक्ष्मी की पूजा से भी है। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और स्वच्छ, प्रकाशमय तथा सुंदर घरों में उनका आगमन होता है। इसलिए भक्त अपने घरों को साफ-सुथरा करके दीपों से सजाते हैं और मां लक्ष्मी से सुख, शांति तथा धन-धान्य की कामना करते हैं।

Why Light Diyas On Diwali Amavasya

दिवाली से जुड़ी पहली पौराणिक कथा

धार्मिक पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान श्री राम ने लंका के राजा रावण का संहार करके सत्य की विजय पताका फहराई थी। इसके बाद, कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को वे माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ 14 वर्षों का वनवास समाप्त कर अयोध्या वापस लौटे थे। अपने प्रिय राजा के पुनः आगमन की खुशी में अयोध्या नगरी के निवासियों ने पूरी अयोध्या को घी के दियों से रोशन कर दिया था। ऐसा माना जाता है कि अंधकार पर प्रकाश की इस जीत और प्रभु राम के भव्य स्वागत की याद में ही हर वर्ष दीपावली पर दीपक जलाने की परंपरा चली आ रही है।

दिवाली से जुड़ी दूसरी कथा

शास्त्रों में वर्णित दूसरी कथा के अनुसार, दिवाली का यह पावन पर्व धन की देवी मां लक्ष्मी के जन्मोत्सव के रूप में भी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। पौराणिक आख्यानों में उल्लेख मिलता है कि जब देवताओं और असुरों द्वारा समुद्र मंथन किया गया था, तब कार्तिक अमावस्या के अति शुभ दिन ही देवी लक्ष्मी क्षीर सागर से प्रकट हुई थीं। यही कारण है कि इस विशेष तिथि पर मां लक्ष्मी की आराधना की शुरुआत हुई। मान्यता है कि दीपावली की रात्रि को विधिवत महालक्ष्मी की पूजा करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती।

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Content Editor

Sarita Thapa

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