Bhoot Chaturdashi 2026: जानिए कब है भूत चतुर्दशी, 14 दीपक जलाने का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
punjabkesari.in Friday, Nov 06, 2026 - 09:55 AM (IST)
Bhoot Chaturdashi 2026 Date & Puja Muhurat: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि सनातन धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखती है। मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, बिहार और पूर्वी भारत के राज्यों में इसे 'भूत चतुर्दशी' के रूप में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात नकारात्मक शक्तियां सक्रिय होती हैं, जिन्हें दूर करने और अपने पूर्वजों (पितरों) का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के उपलक्ष्य में काली चौदस और भूत चतुर्दशी का पर्व मनाया जाएगा। दिवाली के पंच दिवस उत्सव का यह दूसरा दिन है। पूर्वी भारत में काली चौदस का पर्व मूल प्रकृति देवी पार्वती के काली स्वरूप अर्थात आद्या काली के प्रकटोत्सव के रूप में मनाया जाता है। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर आद्या काली के पूजन का विशेष महत्व है। काली शब्द काल का प्रतीक है। काल का अर्थ होता है समय या मृत्यु और इसी कारण से उन्हें काली कहा जाता है। तंत्र शास्त्र के साधक महाकाली की साधना को सर्वाधिक प्रभावशाली मानते हैं तथा यह साधना हर कार्य का तुरंत परिणाम देती है। निपुण साधकों को इस शक्तिशाली साधना से अष्ट सिद्धियों की प्राप्ति होती है। काली चौदस पर्व पर महाकाली के विशेष पूजन और उपाय करने से लंबे समय से चल रही बीमारियां दूर होती है। काले जादू के बुरे प्रभाव से छुटकारा मिलता है, बुरी आत्माओं के छाया से मुक्ति मिलती है। कर्ज से मुक्ति मिलती है। बिजनैस की परेशानियां दूर होती हैं। दांपत्य जीवन से तनाव दूर होता हैं। यही नहीं काली चौदस के विशेष पूजन और उपाय करने से शनि ग्रह के दोष व प्रकोप से भी मुक्ति मिलती है। वर्ष 2026 में यह पर्व कब मनाया जाएगा, पूजा का सबसे शुभ समय क्या रहेगा और इस दिन 14 दीपक ही क्यों जलाए जाते हैं, आइए जानते हैं-

Date & Tithi Timing भूत चतुर्दशी 2026 तिथि और शुभ समय
पंचांग गणना के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 7 नवंबर 2026 को सुबह 10:49 बजे होगी, जबकि इसका समापन 8 नवंबर 2026 को सुबह 11:29 बजे होगा। चूंकि भूत चतुर्दशी की पूजा रात्रि कालीन (प्रदोष काल एवं निशिता काल) में की जाती है, इसलिए रात्रि व्यापिनी चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को ही प्राप्त हो रही है। इसी कारण भूत चतुर्दशी का पर्व शनिवार, 7 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा।

14 दीपक जलाने का पौराणिक रहस्य
भूत चतुर्दशी पर संध्या समय 14 दीपक जलाने की परंपरा अति प्राचीन और फलदायी मानी गई है। इसके पीछे दो मुख्य धार्मिक कारण माने जाते हैं।
पहला भूत चतुर्दशी की पावन रात को 14 पीढ़ियों पूर्व तक के पितृ पृथ्वी पर आगमन करते हैं। उनके मार्ग को प्रकाशित करने तथा उनकी आत्मा की शांति के लिए 14 दीपकों का दान/प्रज्वलन किया जाता है।
दूसरा इस रात तामसिक व नकारात्मक ऊर्जाएं प्रभाव बढ़ाती हैं। मां काली और भगवान शिव की पूजा के साथ 14 दीपकों का प्रकाश घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

घर के इन स्थानों पर जलाएं 14 दीपक
घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर, पूजा घर, कुलदेवी एवं इष्टदेव के समक्ष, पितरों और यमराज की दिशा मानकर दक्षिण दिशा में दीपक अवश्य रखें। तुलसी चौरा, रसोईघर एवं जल स्थान के अतिरिक्त घर के प्रमुख ऊर्जा केंद्रों पर दीपक जलाएं।
भूत चतुर्दशी पूजा विधि
रात्रि में आद्या काली का विधिवत पूजन करें। सरसों के तेल का दीप करें, काजल से तिलक करें, लोहबान से धूप करें, बरगद का पत्ता चढ़ाएं। इमरती का भोग लगाएं तथा नारियल सिर से 7 बार वारकर समर्पित करें। पूजन के बाद इमरती चौराहे पर रखें।
Bhoot Chaturdashi puja Mantra भूत चतुर्दशी पूजा मंत्र: कालिकायै च विद्महे श्मशानवासिन्यै धीमहि तन्नो अघोरा प्रचोदयात्॥

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