नृसिंह जयंती 2021: इस तरह करें भगवान नृसिंह को प्रसन्न

5/16/2021 1:15:28 PM

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नृसिंह जयंती का पर्व मनाया जाता है, जो इस बार 25 मई दिन मंगलवार को पड़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु ने अपने परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नृसिंह अवतार अवतार में अवतरण लिया थाा। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि भगवान विष्णु अपने इस अवतार में संध्या के समय एक खंभे से प्रकट हुए थे। इसी के उपलक्ष्य में इस दिन को बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है। हालांकि इस वर्ष देश में कोरोना की फैली दूसरी लहर के चलते देश के लगभग हर राज्य में एक बार फिर से लॉकडाऊन लगाया जा रहा है। जिस कारण लोगों को अपने घरो में रहना पड़ रहा है। तो ऐसे में ये विचार बहुत से लोगों के मन में यह विचार आ रहा होगा कि घर बैठकर नृसिंह जयंती की पूजा कैसे की जाए, अगर आप भी जानना चाहते हैं को आइए आपको बताते हैं, इस दिन किस विधि से इनकी पूजन विधि व मंत्रों के बारे में-

पूजा स्थल को गोबर से लीप लें तथा कलश में तांबा इत्यादि डालकर उसमें अष्टदल कमल बनाएं।

अष्टदल कमल पर सिंह, भगवान नृसिंह व देवी लक्ष्मीजी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। तत्पश्चात वेदमंत्रों से इनकी प्राण-प्रतिष्ठा कर षोडशोपचार से पूजन करें।

पूरा दिन व्रती उपवास करें।

कोशिश करें कि रात में गायन, वादन, पुराण श्रवण या हरि संकीर्तन से जागरण करें। दूसरे दिन फिर पूजन कर ब्राह्मणों को भोजन करवाएं।

अपनी सामर्थ्य के अनुसार भू, गौ, तिल, स्वर्ण तथा वस्त्रादि का दान करें। 

इस दिन क्रोध, लोभ, मोह, झूठ, कुसंग तथा पापाचार का त्याग करें। तथा साथ ही साथ इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें। 

प्रातः ब्रह्मा मुहूर्त में उठकर सबसे पहले घर की साफ-सफाई करके पूरे घर में गंगा जल या गौमूत्र का छिड़काव करें.

इसके बाद स्वयं स्नान आदि के कार्यों से निवृति हो जाएं। 

अब पूजन स्थल पर बैठकर निम्न मंत्र का जप करें- 
नृसिंह देवदेवेश तव जन्मदिने शुभे।
उपवासं करिष्यामि सर्वभोगविवर्जितः॥

ध्यान रहे इस मंत्र जप के बाद तिल, गोमूत्र, मृत्तिका और आंवला मल कर पृथक-पृथक 4 बार स्नान करें। फिर बाद में शुद्ध जल से स्नान करें।

भगवान नृसिंह के बीज मंत्र-
 ॐ श्री लक्ष्मीनृसिंहाय नम:।।


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Content Writer

Jyoti

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