Shankaracharya Avimukteshwaranand : अब रुकेगा गौ-वंश का अपमान ! जानें क्या है शंकराचार्य की धर्मयुद्ध यात्रा और इसके पीछे का महा-उद्देश्य

punjabkesari.in Saturday, Mar 07, 2026 - 03:16 PM (IST)

Shankaracharya Avimukteshwaranand News : ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बार फिर सनातन धर्म की रक्षा और गौ-माता के सम्मान के लिए चर्चा में हैं। उन्होंने धर्मयुद्ध यात्रा का आह्वान किया है, जो देश के आध्यात्मिक और सामाजिक गलियारों में हलचल पैदा कर रही है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की यह पहल सनातन जगत में एक नई ऊर्जा का संचार कर रही है। धर्मयुद्ध यात्रा केवल एक भौतिक सफर नहीं है, बल्कि यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था और गौ-माता के प्रति उनकी संवेदनाओं का प्रतिबिंब है।

यात्रा का मुख्य एजेंडा गौ-प्रतिष्ठा
इस पूरी यात्रा का केंद्र बिंदु गौ-माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाना और गोवंश की हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना है। शंकराचार्य का मानना है कि जिस देश में गाय को पूजा जाता है, वहां उसकी दुर्दशा और वध सहन नहीं किया जा सकता। वे इस मुद्दे को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राष्ट्र की अस्मिता से जोड़कर देख रहे हैं।

जन-जागरण और धर्म की रक्षा
इस यात्रा का उद्देश्य केवल विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश के कोने-कोने में जाकर लोगों को सनातन धर्म के मूल्यों के प्रति जागरूक करना है। शंकराचार्य चाहते हैं कि हर हिंदू अपने धर्म के प्रति सजग हो और गौ-रक्षा को अपने जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनाए।

धर्मयुद्ध क्यों कहा गया ?
शंकराचार्य ने इसे धर्मयुद्ध की संज्ञा इसलिए दी है क्योंकि वे इसे अधर्म के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई मानते हैं। उनका तर्क है कि जब तक गौ-माता को उचित सम्मान और सुरक्षा नहीं मिलती, तब तक हिंदू समाज का आध्यात्मिक उत्थान अधूरा है।

यात्रा का स्वरूप और विस्तार
यह यात्रा देश के विभिन्न राज्यों और ज्योतिर्लिंगों से होकर गुजरेगी। इस दौरान शंकराचार्य जगह-जगह धर्म सभाएं करेंगे। वे लोगों को गौ-सेवा और सनातन परंपराओं के पालन का संकल्प दिलाएंगे। इस यात्रा के जरिए वे सरकार तक जनता की भावनाओं को पहुंचाना चाहते हैं ताकि गौ-वध रोकने के लिए सख्त कानून बने।

यात्रा का व्यापक संदेश
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया है कि यह यात्रा किसी के विरोध में नहीं, बल्कि धर्म के पक्ष में है। वे चाहते हैं कि भारत की धरती पर एक भी गाय का रक्त न बहे। उनके अनुसार, गौ-माता की सेवा ही वास्तविक देशसेवा और ईश्वर भक्ति है। यह यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक होगी। शंकराचार्य विशेष रूप से युवाओं को इस मुहिम से जोड़ना चाहते हैं ताकि भावी पीढ़ी अपनी संस्कृति को समझे।

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Content Editor

Sarita Thapa

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