Sarva Pitru Amavasya: इस तरह से दें पितरों को विदाई, घर के धन-धान्य में होगी वृद्धि

punjabkesari.in Saturday, Sep 24, 2022 - 09:35 AM (IST)

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Sarva Pitru Amavasya 2022: सनातन धर्म में पितरों के तर्पण और तृप्ति के लिए पितृपक्ष सर्वोत्तम समय होता है। इस दौरान पितृ लोक धरती लोक के अति समीप होता है। धरती लोक का एक वर्ष पितृलोक के एक दिन के बराबर होता है। सर्वपितृ अमावस्या पर हम अपने भूले चुके पितरों का या अगर कोई निश्चित तिथि के दिन श्राद्ध करना भूल गया है तो वह भी इस दिन श्राद्ध कर्म कर सकता है। सर्वपितृ अमावस्या के दिन पूर्वज पुनः अपने पितृ लोक वापिस चले जाते हैं। इसी कारण इसे पितृ विसर्जन के नाम से भी जाना जाता है।

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Sarva pitru amavasya 2022 date and time:
इस वर्ष सर्वपितृ अमावस्या 25 सितंबर 2022 दिन रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन अमावस्या तिथि दोपहर 3 बजकर 12 मिनट पर आरम्भ होगी और अगले दिन 26 सितंबर 2022 को सोमवार दोपहर 3 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में पितृ विसर्जन 25 सितंबर 2022 को ही मनाया जाएगा। वैसे तो सनातन धर्म में सभी अमावस्याओं का महत्व रहता है परन्तु पितृ अमावस्या का विशेष महत्व होता है। इसे महालया अमावस्या भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन सूर्य और चंद्र एक ही राशि में विचरण करते हैं। सूर्य पिता का प्रतिनिधित्व करता है और चंद्रमा माता का, तो इस दिन के लिये ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूर्वजों के निमित्त किया गया दान, पुण्य बहुगुणा प्रभाव बनाकर हमारे पूर्वजों को प्राप्त होता है और पूर्वजों के आशीर्वाद से हमें भी सुख प्राप्त होते हैं और पूर्वज अपनी पूर्ण कृपा व आर्शीवाद देकर पुनः पितृलोक को चले जाते हैं।

Pitra visarjan amavasya 2022: ज्योतिष विज्ञान के अनुसार गंगा नदी या किसी भी नदी के किनारे पर खड़े होकर चौदह दीपों को जलाकर पितरों के निमित्त दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके दीपों को नदी में प्रवाहित करें। पितरों से इन पितृ दिनों के दौरान कोई भी जाने अनजाने में हुई गल्ती की क्षमा याचना करें। अपने पर उनकी पूर्ण कृपा हमेशा बनी रहे, ऐसी उनसे प्रार्थना करें व पूर्ण श्रद्धा भावना से विदाई करें।

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Sarva Pitru Amavasya Pitra Vidai: घर पर आकर घर के मुख्य द्वार पर भी दोनों तरफ दीपक जलाएं व मन में पूर्वजों का पितृ लोक वापिस प्रस्थान का भाव रखें, ऐसा करने से उन्हें पितृलोक वापसी का मार्ग प्रशस्त होगा और वह आसानी से अपने लोक को प्रस्थान कर जाते हैं। इसके पश्चात दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके सबसे पहले यमराज, चित्रगुप्त, पितृ वसु, रूद्र आदित्य इत्यादि को प्रणाम करें। श्राद्ध पर्व के दौरान किये गये श्राद्ध, तर्पण, दान इत्यादि का पुण्य पितरों को प्रदान करने की प्रार्थना करें व पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति की प्रार्थना कर श्री हरि विष्णु जी के बैकुंठ धाम में स्थान प्राप्ति की भी प्रार्थना करें।

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Sanjay Dara Singh
AstroGem Scientist
LLB., Graduate Gemologist GIA (Gemological Institute of America), Astrology, Numerology and Vastu (SSM)

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Content Writer

Niyati Bhandari

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