Ramayana Quotes : रामायण की चौपाइयों में छुपा है सुख-समृद्धि का रहस्य, रामनवमी पर जरूर पढ़ें

punjabkesari.in Thursday, Mar 26, 2026 - 09:34 AM (IST)

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Ramayana Quotes : गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है बल्कि यह जीवन प्रबंधन का एक ऐसा व्यावहारिक शास्त्र है जो हमें कठिन समय में धैर्य और सुख के समय में मर्यादा सिखाता है। रामनवमी के इस पावन अवसर पर, आइए रामचरितमानस की उन चुनिंदा चौपाइयों पर गौर करें जो आपके जीवन में सकारात्मक और शुभ बदलाव ला सकती हैं।

सफलता और कार्य सिद्धि के लिए
जब हम किसी नए कार्य की शुरुआत करते हैं, तो मन में संशय होता है। मानस की यह चौपाई हमें याद दिलाती है कि यदि हृदय में उत्साह और भगवान पर विश्वास हो, तो सफलता निश्चित है।

प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयं राखि कोसलपुर राजा॥

अर्थ: अयोध्यापुरी के राजा श्री रामचंद्रजी को हृदय में रखकर नगर में प्रवेश करके सब काम कीजिए, जिससे सारे कार्य सिद्ध होंगे।

जीवन में बदलाव: यह चौपाई सिखाती है कि आत्मविश्वास और सकारात्मक संकल्प के साथ किया गया कोई भी कार्य निष्फल नहीं होता।

संकट और कठिन समय में धैर्य
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और विपत्तियां आम हैं। ऐसे में यह चौपाई एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है:

"राजिव नयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुखदायक॥"

अर्थ: वे कमल नयन, हाथ में धनुष-बाण धारण किए हुए, भक्तों की विपत्ति का नाश करने वाले और उन्हें सुख देने वाले हैं। जब भी आप स्वयं को अकेला या संकट में पाएं, तो इस मंत्र का स्मरण करें। यह आपको मानसिक शांति और विपरीत परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है।

पुरुषार्थ और कर्म का महत्व
अक्सर लोग भाग्य के भरोसे बैठ जाते हैं, लेकिन रामचरितमानस कर्म को प्रधानता देती है।

सकल पदारथ ऐहि जग माहीं। करम हीन नर पावत नाहीं॥"

अर्थ: इस संसार में सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन जो मनुष्य कर्महीन होते हैं, उन्हें कुछ भी हासिल नहीं होता।  यह चौपाई हमें आलस्य त्यागने और एक्शन मोड में आने की प्रेरणा देती है। सफलता के लिए केवल प्रार्थना काफी नहीं, पुरुषार्थ अनिवार्य है।

ममता रत सन ग्यान कहानी। अति लोभी सन बिरति बखानी॥
क्रोधिहि सम कामिहि हरिकथा। ऊसर बीज बएँ फल जथा॥

जो व्यक्ति मोह-माया और ममता में पूरी तरह डूबा हुआ है, उसे ज्ञान की बातें सुनाना व्यर्थ है। जिसके मन में मेरा-तेरा और सांसारिक वस्तुओं के प्रति गहरा लगाव है, उसे आत्मा और परमात्मा का गूढ़ ज्ञान समझ नहीं आता। अत्यधिक लालची व्यक्ति के सामने वैराग्य या त्याग की महिमा का बखान करना बेकार है। जिसका पूरा ध्यान धन संचय और लाभ पर हो, उसे संन्यास या सादगी की बातें बेमानी लगती हैं।

काम, क्रोध, मद, लोभ, सब, नाथ नरक के पंथ।
सब परिहरि रघुबीरहि, भजहुँ भजहिं जेहि संत


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Content Editor

Prachi Sharma

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