Ekadant Sankashti Chaturthi 2026: अंगारकी योग में गजानन करेंगे बेड़ा पार, जानें चंद्रमा को अर्घ्य देने का गुप्त रहस्य और पूजा की सटीक विधि

punjabkesari.in Tuesday, May 05, 2026 - 11:05 AM (IST)

Ekadant Sankashti Chaturthi 2026: आज ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकदंत संकष्टी चतुर्थी है। मंगलवार का दिन होने के कारण यह अंगारकी संकष्टी चतुर्थी का अद्भुत संयोग बन रहा है। आज के दिन गणेश जी की पूजा करने से न केवल संकट दूर होते हैं, बल्कि मंगल दोष और कर्ज से भी मुक्ति मिलती है। विद्वान कहते हैं की बिना चंद्र दर्शन गणेश जी की पूजा व व्रत अधूरा रहता है। धार्मिक स्रोतों के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का समापन केवल रात में चंद्र दर्शन और उन्हें जल, दूध या गंगाजल अर्पित करने के बाद ही होता है। यदि कोई भक्त अर्घ्य नहीं देता, तो उसे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।

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ज्योतिष की मान्यता के अनुसार इस दिन चंद्रमा का पूजन करना बहुत फलदायी माना जाता है। इसके साथ ही कहा जाता है कि अगर इस दिन पूजन के साथ-साथ इनका यानि चंद्रदेव का दर्शन करता है उसकी कुंडली के सभी चंद्र दोष खत्म हो जाते हैं। 

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Ekadanta Sankashti Chaturthi Puja vidhi एकदंत संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि: घर की पूर्व दिशा में लाल कपड़ा बिछाकर, तांबे के लोटे में जल दूध, अक्षत, सुपारी, सिक्के, इत्र डालकर तथा लोटे के मुख पर पीपल के पत्ते पर नारियल रखकर विनायक कलश स्थापित करें और साथ ही गणेश जी का चित्र व यंत्र रखकर षोडशोपचार पूजन करें। चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर दीपक करें, गुगल की धूप करें, सिंदूर से तिलक करें, लाल गूढ़ल के फूल चढ़ाएं, बेसन के 4 लड्डू का भोग लगाएं। लाल चंदन की माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। शाम को चंद्रोदय के समय तांबे के लोटे में जल, इत्र, हल्दी, चंदन, रोली मिलाकर चंद्रमा को अर्ध्य दें और भोग प्रसाद के स्वरूप सभी में वितरित करें।

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Ekadant Sankashti Chaturthi Puja Mantra एकदंत संकष्टी चतुर्थी पूजा मंत्र: ॐ चंद्रचूडामण्ये नमः॥

चंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए इन मंत्रों का उच्चारण करें, ध्यान रहे कि चंद्र मंत्र का जाप 11 बार किया जाता है।
चंद्रदेव के मंत्र
दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव सम्भवम ।
नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणं ।।

ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:।।

ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:।

ॐ भूर्भुव: स्व: अमृतांगाय विदमहे कलारूपाय धीमहि तन्नो सोमो प्रचोदयात्।

Ekadant Sankashti Chaturthi story एकदंत संकष्टी चतुर्थी कथा: शास्त्रनुसार भगवान गणेश, चतुर्थी के स्वामी हैं। अतः चतुर्थी गणेश जी को अत्यधिक प्रिय है। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की इस चतुर्थी में गणेश के गणाधिप स्वरूप के पूजन का विधान है। गणाधिप का अर्थ है गणों के अधिपति अतः ये महादेव के गणों के मुख्य अधिपति हैं। इस स्वरूप में इनका वर्ण गहरा लाल है। ये एकदंत है व गजमुख हैं। मूषक पर सवार लंबोदर ने गहरे लाल रंग से वस्त्र पहने हुए हैं। इनके मस्तक पर लाल चंदन का त्रिपुंड है व इनकी दोनों पत्नि ऋद्धि-सिद्धि इनके साथ हैं। देवर्षि के उपदेश से इन्होंने भूमि पर 'राम' लिखकर उसकी प्रदक्षिणा की थी, जिससे ब्रह्मदेव ने उन्हें प्रथम पूज्य बनाया था। अगहन में गणेश पूजन के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर जौ, तिल, चावल, चीनी, घी का शाकला बनाकर हवन करने से शत्रु वशीभूत हो जाता है। हर कार्य निर्विघ्न सम्पूर्ण होता है व कर्ज़ों से मुक्ति मिलती है।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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