Ram Navami 2026 : राम नवमी पर करें 'श्रीराम स्तुति' का पाठ, दुख-दर्द होंगे पल भर में दूर
punjabkesari.in Monday, Mar 23, 2026 - 10:02 AM (IST)
Ram Navami 2026 : चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि केवल एक कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के अवतरण का महापर्व है। साल 2026 में राम नवमी का यह उत्सव और भी खास होने वाला है, क्योंकि भक्तगण प्रभु राम की भक्ति में सराबोर होकर अपने जीवन के कष्टों से मुक्ति की राह खोज रहे हैं। शास्त्रों और विद्वानों का मानना है कि इस शुभ दिन पर श्रीराम स्तुति का पाठ करना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मन की शांति और बाधाओं के निवारण का अचूक मंत्र है। जो भक्त पूर्ण विश्वास के साथ राम नवमी के दिन इस स्तुति का गायन करते हैं, उनके मानसिक तनाव, शारीरिक कष्ट और जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं पल भर में दूर हो जाती हैं। तो आइए जानते हैं, इस राम नवमी पर श्रीराम स्तुति का पाठ कैसे आपके जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता का नया संचार कर सकता है।
श्रीराम स्तुति
॥दोहा॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन
हरण भवभय दारुणं ।
नव कंज लोचन कंज मुख
कर कंज पद कंजारुणं ॥1॥
कन्दर्प अगणित अमित छवि
नव नील नीरद सुन्दरं ।
पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि
नोमि जनक सुतावरं ॥2॥
भजु दीनबन्धु दिनेश दानव
दैत्य वंश निकन्दनं ।
रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल
चन्द दशरथ नन्दनं ॥3॥
शिर मुकुट कुंडल तिलक
चारु उदारु अङ्ग विभूषणं ।
आजानु भुज शर चाप धर
संग्राम जित खरदूषणं ॥4॥
इति वदति तुलसीदास शंकर
शेष मुनि मन रंजनं ।
मम् हृदय कंज निवास कुरु
कामादि खलदल गंजनं ॥5॥
मन जाहि राच्यो मिलहि सो
वर सहज सुन्दर सांवरो ।
करुणा निधान सुजान शील
स्नेह जानत रावरो ॥6॥
एहि भांति गौरी असीस सुन सिय
सहित हिय हरषित अली।
तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि
मुदित मन मन्दिर चली ॥7॥
॥सोरठा॥
जानी गौरी अनुकूल सिय
हिय हरषु न जाइ कहि ।
मंजुल मंगल मूल वाम
अङ्ग फरकन लगे।
राम जी के मंत्र
ॐ श्री रामाय नमः॥
ॐ श्री रामचन्द्राय नमः।
ॐ रां रामाय नमः।
श्रीराम तारक मंत्र - श्री राम, जय राम, जय जय राम।
श्रीराम गायत्री मंत्र -
ॐ दाशरथये विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि।
तन्नो रामः प्रचोदयात्॥
श्री राम रक्षा मंत्र - ॐ ह्रां ह्रीं रां रामाय नमः॥
राम ध्यान मंत्र - श्री रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नमः।
विपत्ति में रक्षा हेतु-
राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।
सहस्त्र नाम तत्तुन्यं राम नाम वरानने ।
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