इन 5 देवों की पूजा से होगा हर परेशानी का अंत

5/22/2019 4:41:58 PM

ये नहीं देखा तो क्या देखा (VIDEO)
दुनिया का कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसके जीवन में परेशानियां न हों। जी हां, चाहे जितना भी अमीर इंसा क्यों न हो इसके जीवन में भी किसी न किसी प्रकार की टेंशन तो होती है।अब हर कोई यही चाहता है कि उसका जीवन समस्या मुक्त हो जाएं । लेकिन सवाल ये है कि इनसे यानि इन सब परेशानियों से छुटकारा पाया कैसा जाए। तो आपको बता दें कि इसके लिए आपको ज्यादा कुुछ करने की ज़रूरत नहीं है। जी, जी आपने बिल्कुल सही पढ़ा। अपनी लाइफ की दिक्कतों को कम  करने के लिए ज्योतिष में कुछ बहुत ही खास बताया गया है।
PunjabKesari, Panch Dev, पंच देव
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर आपके जीवन में कई तरह की परेशानियां या समस्याएं  है, जिस कारण आपकी लाइफ में उथल-पुथल हो गई है तो आपको यहां वहां भटकने की ज़रूरत नहीं है बल्कि केवल 5 देवताओं में से किसी एक की भी शरण में जाने की है। जिनकी कृपा से अपनी सभी परेशानी दूर हो सकती हैं। तो चलिए जानते हैं आखिर ये पांच देवी देवता हैं कौन और कैसे करें इनकी पूजा-

संसार में देव पूजा को स्थायी रखने के उद्देश्य से वेदव्यासजी ने विभिन्न देवताओं के लिए अलग-अलग पुराणों की रचना की। अत: मनुष्य अपनी रुचि के अनुसार किसी भी देव को अपना आराध्य मानकर पूजा कर सकता है। बता दें  उपासना एक ब्रह्म की ही होती है क्योंकि पंचदेव ब्रह्म के ही प्रतिरुप (साकार रूप) हैं जो भक्तों को मनवांछित फल प्रदान करते हैं।

पंचदेव
शास्त्रों के मुताबिक परब्रह्म परमात्मा निराकार व अशरीरी है, अत: साधारण मनुष्यों के लिए उनके स्वरूप को समझ पाना असंभव है। इसलिए निराकार ब्रह्म ने अपने साकार रूप में पांच देवों को उपासना के लिए निश्चित किया जिन्हें पंचदेव कहते हैं। ये पंचदेव हैं- विष्णु, शिव, गणेश, सूर्य और शक्ति। सूर्य, गणेश, देवी, रुद्र और विष्णु- ये पांच देव सब कामों में पूजने योग्य हैं।

मान्यता है कि जो श्रद्धा विश्वास के साथ इनकी आराधना करता है वे कभी हीन नहीं होता, उन्हें यश-पुण्य और प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। वेद-पुराणों में इनकी उपासना को महाफलदायी और  बताया गया है।

पंचदेव पंचभूतों के अधिष्ठाता (स्वामी) है
पंचदेव- 1- आकाश, 2- वायु, 3- अग्नि, 4-जल और 5- पृथ्वी आदि, और इन पंचभूतों के अधिपति है

सूर्य देव वायु तत्त्व के अधिपति हैं इसलिए इनकी अर्घ्य और नमस्कार द्वारा आराधना की जाती है।

भगवान गणेश जल तत्त्व के अधिपति हैं, इनकी सर्वप्रथम पूजा करने का विधान है, क्योंकि सृष्टि के आदि में सर्वत्र ‘जल’ तत्त्व ही था।

शक्ति (देवी, जगदम्बा) अग्नि तत्त्व की अधिपति हैं, इसलिए भगवती देवी की अग्निकुण्ड में हवन के द्वारा पूजा करने का विधान है।
PunjabKesari, Devi Bhagwati, देवी भगवती
शिव जी पृथ्वी तत्त्व के अधिपति हैं इसलिए उनकी शिवलिंग के रुप में पार्थिव-पूजा करने का विधान है।

विष्णु आकाश तत्त्व के अधिपति हैं इसलिए उनकी शब्दों द्वारा स्तुति करने का विधान है।

अन्य देवों की अपेक्षा इन पंचदेवों के नाम के अर्थ भी ऐसे है कि जो इनके ब्रह्म होने के बारे में पता चलता है।

विष्णुजी अर्थात् सबमें व्याप्त

शिवजी यानी कल्याणकारी

गणेशजी अर्थात् विश्व के सभी गणों के स्वामी

सूर्य अर्थात् सर्वगत (सर्वत्र व्याप्त)

शक्ति अर्थात् सामर्थ्य

पंचदेव और उनके उपासक

विष्णु के उपासक ‘वैष्णव’ कहलाते हैं।

शिव के उपासक ‘शैव’ के नाम से जाने जाते हैं।
PunjabKesari, Lord Shiva, Shiv ji, Bholenath, भगवान शंकर, भोलेनाथ
गणपति के उपासक ‘गाणपत्य’ कहलाते हैं।

सूर्य के उपासक ‘सौर’ होते हैं।

शक्ति के उपासक ‘शाक्त’ कहलाते हैं।


Jyoti

Related News