बहुत ही शानदार है धोनी की कुंडली, संन्यास के बाद भी छुएंगे बुलंदियां

2020-08-16T18:18:29.673

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत को बुलंदियों तक पहुंचाने वाले महेंद्र सिंह धोनी ने देश की आजादी की सालगिरह पर क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा करके सबको चौंका दिया है। धोनी ने भारतीय क्रिकेट टीम की 16 सालों तक सेवा की और कई बड़े खिताब टीम को जिताए। इस दौरान धोनी ने बतौर विकेटकीपर बल्लेबाज और कप्तान कई ऐसे रिकॉर्ड अपने नाम किए जिनके आसपास पहुंचना भी शायद किसी के लिए मुमकिन हो पाए। धोनी दुनिया के इकलौते ऐसे कप्तान रहे, जिन्होंने आईसीसी के तीनों बड़े टूर्नामेंट अपने नाम किए हैं। धोनी की अगुवाई में भारतीय टीम ने साल 2007 में वर्ल्ड T20, आईसीसी वर्ल्ड कप 2011 और 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी। क्रिकेट के इतिहास में धोनी सबसे ज्यादा मैचों में कप्तानी करने वाले कप्तान हैं। उनकी कप्तानी में भारत ने 27 टेस्ट मैच अपने नाम किए।
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महेंद्र सिंह धोनी ने ऐसा करिश्मा कैसे किया और क्या सचमुच क्रिकेट से संन्यास के बाद उनका कैरियर खत्म हो गया है? 

इस सवाल का जवाब ज्योतिष में छिपा है,  उनके ग्रह नक्षत्रों में छिपा है , उनके ग्रह नक्षत्रों की ताकत में छिपा है। आज इस महान क्रिकेट खिलाड़ी की कुंडली की पड़ताल करते हुए हम अपने दर्शकों को बताएंगे कि ऐसे कौन से स्टार उनकी कुंडली में थे जिन्होंने उनकी प्रतिभा का परचम पूरी दुनिया में फहराया और क्रिकेट केेे मैदान में जुझारू पन की कहानियां रचने वाले धोनी को मिस्टर कूल का खिताब भी मिला।

बता दें महेंद्र सिंह धोनी का जन्म 7 जुलाई 1981 को सुबह 11:15 पर रांची शहर में हुआ। उनके जन्म के समय उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र चल रहा था, जिसमें उन्हें देश काा सर्वोच्च खिलाड़ी बनाने के साथ-साथ पूरी दुनिया में शोहरत दिलाई। उनका जन्म कन्या लग्न और कन्या राशि में हुआ। उनके कुंडली पर अगर नजर मारी जाए तो कुंडली के प्रथम भाव में देव गुरु बृहस्पति, शनि और चंद्रमा बैठे हैं। कुंडली के पंचम भाव में केतु बैठे हैं। नवम भाव में मंगल हैं दशम भाव जिसे पिता व राजकाज भाव भी कहा जाता है , वहां सूर्य और बुध बैठे हैं। कुंडली के एकादश भाव में शुक्र व राहु बैठे हैं। 

इनकी कुंडली में लग्नेश बुध दशम भाव में सूर्य के साथ बुधादित्य नामक महाराज योग बना रहे हैं। देव गुरु बृहस्पति और चंद्रमा केंद्र में बैठकर गजकेसरी नामक राजयोग बना रहे हैं। इसी गजकेसरी योग की बदौलत धोनी को ठंडे दिमाग से निर्णय लेकर क्रिकेट के मैदान में अपनी प्रतिद्वंदी टीम के खिलाफ व्यूरचना रचना में सफलता मिलती आई है और उन्हें बहुत ही उच्च बौद्धिक स्तर का प्लेयर माना जाता रहा है।
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धोनी की कुंडली में मंगल ग्रह की मजबूत पोजीशन ने उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत बनाया है और लग्न में देव गुरु बृहस्पति व सूर्य के योग ने उन्हें अच्छी हाइट व शानदार पर्सनैलिटी दी है। यही नहीं, पंचमेश शनि गुरु के साथ केंद्र में राजयोग बना रहा है। गुरु बृहस्पति ने उन्हें गजब की लोकप्रियता दी है।  बुध ने उन्हें डिसीजन मीटिंग पावर दी है। इनकम स्थान पर एकादश भाव में बैठे शुक्र ने उन्हें आर्थिक लाभ दिए हैं। शुक्र फिल्म, अभिनय, विज्ञापन,  टीवी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का कारक ग्रह है और महेंद्र सिंह धोनी इन क्षेत्रों में छाए रहे हैं। उन पर फिल्म भी बनी।
 
महेंद्र सिंह धोनी की कुंडली में देव गुरु बृहस्पति का केंद्र में होना और नवम भाव जिसे भाग्य स्थान भी कहा जाता है, वहां पर देव गुरु बृहस्पति की दृष्टि होना धोनी को मान सम्मान दिलवाता आया है और भविष्य में भी दिलवाता रहेगा। मैं यह भी बताना चाहूंगा  कि दशम भाव केे स्वामी बुुध के स्व राशि होने के कारण पंच महापुरुष भद्र योग धोनी की कुंडली में बना है। गहरा भी बनाता है यही वजह है कि धोनी क्रिकेट के मैदान में भी कई बार अचानक कोई निर्णय लेकर प्रतिद्वंदी टीम को चौंकाते रहे हैं।

महेंद्र सिंह धोनी का जब जन्म हुआ, तब सूर्य की महादशा में उन्हें राहु की अंतर्दशा चल रही थी। 8 दिसंबर 2002 से उन्हें 18 साल के लिए राहु की महादशा शुरू हुई। राहु की इसी महादशा में 2003- 04 में महेंद्र सिंह धौनी के क्रिकेट करियर की शुरुआत  हुई। इसी साल इंडिया A के लिए धौनी टूर पर गये थे. यह टूर उनके लिए शानदार रहा. उसी दौरे में भारत A और पाकिस्तान A के बीच खेले गये रोचक मुकाबले में धौनी ने अच्छे रन बनाये थे। 2007 से 2018 के बीच कुल 332 मैचों में भारतीय टीम की कप्तानी की है जिसमें टीम को 178 बार जीत मिली। धोनी दुनिया के इकलौते क्रिकेटर हैं जिन्होंने नंबर 3 से लेकर नबंर 7 तक सभी बल्लेबाजी पाॉजिशन पर शतक जड़ा है।
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अभी भी धोनी को राहु की महादशा चल रही है। राहु की अंतर्दशा में धोनी का जन्म हुआ। राहु की महादशा में इनका क्रिकेट कैरियर शुरू हुआ। राहु की महादशा में ही शानदार पारियां खेलते हुए इन्होंने क्रिकेट से संन्यास लिया। अभी 8 दिसंबर 2020 तक धोनी को राहु की महादशा रहनी है और इसके बाद 16 साल के लिए इन्हें देव गुरु बृहस्पति की महादशा शुरू होनी है। देव गुरु बृहस्पति इनके लग्न में है और भाग्य स्थान को देख रहे हैं। महेंद्र सिंह धोनी सन्यास लेने के बाद अब आराम से बैठने वाले नहीं हैं।

उनके ग्रहों की चाल उन्हें नई पारी के लिए मैदान में लेकर आएगी। क्रिकेट की तरह यह पारी भी बहुत ही शानदार होगी। चाहे यह पारी राजनीति के मैदान में हो, चाहे क्रिकेट की दुनिया में किसी शिखर पर बैठने वाली पदवी की। धोनी के हाथ में कोई ना कोई कमान रहेगी और देव गुरु बृहस्पति धोनी की कुंडली में लग्न में सूर्य के साथ बैठकर  धोनी  तो चमकाते रहेंगे।

गुरमीत बेदी
gurmitbedi@gmail.com   

 


Jyoti

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