श्रीकृष्ण जन्मभूमि से यमुना की स्वच्छता तक, मथुरा में मोरारी बापू ने दिया आस्था और संरक्षण का संदेश
punjabkesari.in Sunday, Oct 18, 2026 - 05:22 PM (IST)
Morari Bapu Mathura Visit Krishna Janmabhoomi : स्वस्तिक भारत यात्रा के दौरान पूज्य मोरारी बापू ने भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और यमुना नदी से जुड़े विषयों पर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। इस दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि की मुक्ति की बात कही और यमुना की स्वच्छता के महत्व पर भी संदेश दिया। उनके विचारों में भगवान श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा, धार्मिक स्थलों की महत्ता और नदियों के संरक्षण का भाव दिखाई दिया। मथुरा भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली होने के कारण करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां पहुंचने वाले भक्त भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन और उनकी लीलाओं का स्मरण करते हैं। मोरारी बापू ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि के संदर्भ में अपनी बात रखते हुए इसके मुक्त होने की कामना व्यक्त की। उनकी इस टिप्पणी को भगवान श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा और जन्मभूमि से जुड़े भावनात्मक विषय के रूप में देखा जा रहा है।
मथुरा और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का यमुना नदी से गहरा धार्मिक संबंध है। श्रीकृष्ण की अनेक लीलाओं का वर्णन यमुना के तट से जुड़ा हुआ है। ऐसे में यमुना की स्वच्छता का विषय धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। मोरारी बापू ने यमुना की सफाई के विषय पर भी संदेश दिया। यमुना को स्वच्छ रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज और श्रद्धालुओं की सामूहिक जिम्मेदारी भी है। नदी में कचरा न डालना, पूजा सामग्री का उचित निपटान करना और जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना ऐसे कदम हैं, जिनसे नदी के संरक्षण में योगदान दिया जा सकता है।
स्वस्तिक भारत यात्रा का उद्देश्य
मोरारी बापू की स्वस्तिक भारत यात्रा का संबंध आध्यात्मिक संदेश, भारतीय धार्मिक परंपराओं और विभिन्न तीर्थस्थलों से जुड़ाव से है। यात्रा के दौरान वह अलग-अलग स्थानों पर श्रीराम कथा के माध्यम से प्रेम, सद्भाव, भक्ति और धर्म के मूल विचारों को सामने रख रहे हैं। मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण और यमुना से जुड़े विषयों का उल्लेख इस यात्रा के धार्मिक महत्व को और व्यापक बनाता है। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि के प्रति श्रद्धा और यमुना की स्वच्छता का संदेश लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत तथा प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण पर विचार करने की प्रेरणा देता है।
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