Bharat Swastik Yatra: श्रीकृष्ण की पावन लीलाभूमि में पूज्य मोरारी बापू की कथा ने भारत की आध्यात्मिक विरासत और सनातन धर्म की चिरंतन परंपराओं को किया रेखांकित

punjabkesari.in Saturday, Oct 17, 2026 - 04:22 PM (IST)

मथुरा (परविंदर कुमार मिश्रा): भगवान श्रीकृष्ण की पावन भूमि मथुरा में 17 अक्टूबर को भारत स्वस्तिक यात्रा के अंतर्गत पूज्य मोरारी बापू की रामकथा आयोजित हुई। श्रीकृष्ण भक्ति की समृद्ध परंपराओं में रची-बसी ब्रजभूमि आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक विरासत की जीवंत धरोहर है, जहां श्रीकृष्ण की लीलाएं आज भी भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन को प्रेरित करती हैं।

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि के रूप में पूजित मथुरा भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना में विशेष स्थान रखती है। वृंदावन, गोकुल, गोवर्धन, बरसाना और ब्रज के अन्य पावन स्थलों के साथ यह संपूर्ण क्षेत्र भक्ति, तीर्थाटन और श्रद्धा की उस परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसने पीढ़ियों से सनातन धर्म की चेतना को समृद्ध किया है।

मथुरा में आयोजित रामकथा भारत स्वस्तिक यात्रा की उस व्यापक संकल्पना का हिस्सा रही, जिसके अंतर्गत सनातन धर्म के संदेश के माध्यम से भारत की पवित्र भौगोलिक विरासत, आध्यात्मिक परंपराओं और राष्ट्रीय पहचान को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

पूज्य मोरारी बापू ने कहा, “वृंदावन रूप की भूमि है, शब्द की भूमि है, स्पर्श की भूमि है, रस की भूमि है और यहां तक कि गुणातीत गंध की भी भूमि है, जो इंद्रियों से परे है। आज मैंने रमेश बाबा का स्मरण किया, जो एक बार मुझे वृंदावन के वनों में ले गए थे और उन्होंने अपने गहन आध्यात्मिक अनुभवों एवं अनुभूतियों को मेरे साथ साझा किया था। मैंने बालकरामजी का भी स्मरण किया, जो अब इस संसार में नहीं हैं। आज उनके स्थान पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनकी उपस्थिति और उनकी आध्यात्मिक यात्रा आज भी मेरे हृदय के निकट है।

किसी ने पूछा कि राम नाम अमृत कैसे बन सकता है। जब कोई व्यक्ति अनगिनत जन्मों से भगवान के नाम का जप करता आया हो और वह उस दिव्य नाम का उच्चारण करे अथवा भगवान की कथा सुनाए और हम उसे सुनकर उसी नाम का उच्चारण करें तो वह नाम हमारे लिए अमृत बन जाता है। आज कथा का समापन संगीत, आनंद और रास के साथ हुआ। जब भक्ति संगीत और नृत्य के माध्यम से अभिव्यक्त होती है, तो वह ऐसा उत्सव बन जाती है, जिसमें सभी सहभागी हो सकते हैं।”

श्रीकृष्ण की परंपरा में ब्रजभूमि का विशिष्ट स्थान है। मथुरा भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और कंस वध के लिए जानी जाती है, जबकि गोकुल और वृंदावन उनकी बाल लीलाओं तथा किशोरावस्था की दिव्य लीलाओं से जुड़े हैं। गोवर्धन पर्वत, जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए उठाया था, आज भी एक प्रमुख तीर्थस्थल है। वहीं, यमुना नदी ब्रज की आध्यात्मिक पहचान का अभिन्न अंग है।

समय के साथ ब्रज भारत में भक्ति आंदोलन के प्रमुख केंद्रों में से एक के रूप में विकसित हुआ। वल्लभाचार्य, चैतन्य महाप्रभु, स्वामी हरिदास, सूरदास और वृंदावन के षड्गोस्वामियों सहित अनेक संतों एवं आचार्यों ने यहां की समृद्ध भक्ति परंपराओं को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी विरासत ने भारत की धार्मिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना पर स्थायी प्रभाव छोड़ा है।

इस प्रकार, मथुरा में भारत स्वस्तिक यात्रा का पड़ाव ऐसे क्षेत्र में पहुंचा, जहां पवित्र भूगोल, जीवंत आध्यात्मिक परंपराएं और सनातन धर्म की चिरंतन विरासत एक-दूसरे से जुड़ती हैं।

भारत स्वस्तिक यात्रा की परिकल्पना भारत की आध्यात्मिक विरासत, पवित्र स्थलों और राष्ट्रीय पहचान को जोड़ने के व्यापक संकल्प के साथ की गई है। इस यात्रा में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चारों पीठों और ओंकारेश्वर को शामिल किया जा रहा है, जिसका आदि शंकराचार्य के जीवन और आध्यात्मिक यात्रा से गहरा संबंध है। इसके साथ ही भारत के राष्ट्रगान में उल्लिखित प्रत्येक राज्य और नदी को भी यात्रा में समाहित किया जा रहा है। सिंध वर्तमान में भारत की सीमाओं से बाहर है, ऐसे में भागा सीमा पर कथा का आयोजन इस व्यापक राष्ट्रीय संकल्पना के संदर्भ में विशेष महत्व रखता है।

भारत स्वस्तिक यात्रा का आयोजन संत कृपा सनातन संस्थान द्वारा पूज्य मोरारी बापू के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।

मथुरा के इस पड़ाव के महत्व पर मदन पालीवाल, चेयरमैन, मिराज ग्रुप एवं मैनेजिंग ट्रस्टी, संतकृपा सनातन संस्थान ने कहा, “मथुरा और ब्रजभूमि भारत की आध्यात्मिक चेतना में विशेष स्थान रखते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और उनकी दिव्य लीलाओं से जुड़ी यह भूमि सदियों से भक्ति, श्रद्धा और प्रेम की परंपराओं के माध्यम से पीढ़ियों को प्रेरित करती आई है। यह यात्रा सनातन धर्म के संदेश को भारत के कोने-कोने तक पहुंचाने और अपनी पवित्र विरासत के साथ हमारे सामूहिक जुड़ाव को सुदृढ़ करने का एक प्रयास है।”

मथुरा में आयोजित रामकथा यात्रा के प्रथम चरण का हिस्सा रही। यह चरण 10 अक्टूबर को कन्याकुमारी से आरंभ हुआ था और 23 अक्टूबर, 2026 को केदारनाथ में संपन्न होने वाला है।

लगभग 9,000 किलोमीटर लंबी भारत स्वस्तिक यात्रा में करीब 900 श्रद्धालु दो विशेष ट्रेनों कैलाश भारत गौरव ट्रेन और चित्रकूट भारत गौरव ट्रेन से पूज्य मोरारी बापू के साथ यात्रा कर रहे हैं। इन ट्रेनों में क्रमशः 22 और 16 डिब्बे हैं।

पूज्य मोरारी बापू की रामकथा सत्य, प्रेम और करुणा के मूल्यों पर आधारित है। इस यात्रा के माध्यम से इन मूल्यों को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने और लोगों को आपस में जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

यात्रा के दौरान आयोजित रामकथा और अन्य कार्यक्रम सभी के लिए खुले हैं। समावेशिता और सेवा की अपनी परंपरा के अनुरूप, प्रत्येक पड़ाव पर भंडारे का आयोजन किया जाता है, जहां प्रतिदिन श्रद्धालुओं को निःशुल्क शाकाहारी भोजन प्रसाद के रूप में परोसा जाता है।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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