भारत स्वस्तिक यात्रा: श्रद्धालुओं संग कन्याकुमारी से कश्मीर तक भक्ति का महासंगम, मोरारी बापू और संतों ने दिया राष्ट्र-एकता का संदेश
punjabkesari.in Saturday, Oct 10, 2026 - 12:35 PM (IST)
Bharat Swastik Yatra: सनातन संस्कृति, भक्ति और राष्ट्रीय एकात्मता का अलख जगाने के लिए 'भारत स्वस्तिक यात्रा' का भव्य आयोजन किया गया है। इस पावन अवसर पर पूज्य मोरारी बापू, शृंगेरी पीठ से पधारे शंकराचार्य आनंद जी और सतुआ बाबा ने विशेष रूप से पहुंचकर श्रद्धालुओं को अपनी अमृतमयी वाणी से निहाल किया। कन्याकुमारी से शुरू होकर जम्मू और अमृतसर के रास्ते कश्मीर तक जाने वाली यह यात्रा 'निर्माण से निर्वाण' का मार्ग प्रशस्त करती है। मोरारी बापू ने सनातनियों को केवल अनुयायी न मानकर 'पुष्प' की संज्ञा दी और सभी श्रद्धालुओं का हृदय से स्वागत किया।
कन्याकुमारी से कश्मीर: 'निर्माण से निर्वाण' की ओर कदम
आमतौर पर यात्राएं कश्मीर से कन्याकुमारी की ओर होती हैं, लेकिन इस बार कन्याकुमारी से कश्मीर का मार्ग चुना गया है। मोरारी बापू ने बताया कि भगवान श्री राम ने अपनी यात्रा की शुरुआत यहीं से की थी और शंकराचार्य जी की प्रेरणा से यह पथ तय किया गया। यात्रा दुर्गम अवश्य है, लेकिन "सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते" के भाव के साथ हनुमान जी की कृपा से सब सुगम हो जाता है। इस दौरान द्वारिका से जगन्नाथ जी की दूसरी यात्रा और शारदा पीठ का भी भावपूर्ण स्मरण किया गया।
900 यात्री, 2 रथ (ट्रेन) और भाषा की बाधाओं से परे एकता
इस पावन यात्रा में 900 श्रद्धालु भाग ले रहे हैं, जो जम्मू और अमृतसर होते हुए आगे बढ़ेंगे। यात्रा के लिए दो विशेष रथ (ट्रेन) बनाए गए हैं। बापू ने कहा कि वे हर राज्य में जाते हैं और भक्ति के मार्ग में भाषा कभी बाधा नहीं बनती। जैसे भारत के विभिन्न हिस्सों में सोलह श्रृंगार अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल होते हैं, वैसे ही स्वस्तिक के चार कोने पूरे भारत को एक सूत्र में पिरोते हैं।
'स्वास्ती' का अर्थ आशीर्वाद: संतों का आध्यात्मिक मार्गदर्शन
शृंगेरी पीठ के शंकराचार्य आनंद जी ने धर्म की गूढ़ बातों को बारीकी से समझाते हुए बताया कि 'स्वास्ती' का वास्तविक अर्थ आशीर्वाद होता है। सतुआ बाबा ने 'जय सिया राम' के संबोधन से सभी का स्वागत किया और कहा कि जब-जब कथा होती है, श्री हनुमान जी की याद स्वतः ही आ जाती है। मोरारी बापू ने कहा कि राम कथा का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति के दुर्गुणों और उसकी हर पीड़ा पर विजय प्राप्त करना है।
युवाओं को संदेश, स्वास्थ्य की अपील और नवरात्र साधना
मोरारी बापू ने पत्रकारों का स्वागत करते हुए आज के समय में परेशान युवाओं के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और रामचरितमानस की चौपाई "सब नर करहि परस्पर प्रीति" का उल्लेख करते हुए बड़ों का आशीर्वाद लेने की प्रेरणा दी।
स्वास्थ्य का ध्यान रखने की अपील: बापू ने सभी यात्रियों से विशेष आग्रह किया कि कोई भी अपनी तबीयत बिगाड़ कर यात्रा न करे।
नवरात्र व उपासना: अमावस और नवरात्र के प्रारंभ अवसर पर मां कन्याकुमारी, कालडी धाम और शृंगेरी पीठ को प्रणाम करते हुए बापू ने सभी से जन-कल्याण और पुण्य के लिए रामचरितमानस का पाठ और मां भगवती की उपासना करने का आह्वान किया।
प्रवचन के अंत में मोरारी बापू ने विश्व शांति और कल्याण की कामना के साथ मंत्र दोहराया: सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे संतु निरामया सर्वे भद्राणि पश्यन्तु
