कुंडली में किन स्थितियों में मंगल नहीं होता पापी, क्या आप जानते हैं?

2021-05-04T15:23:44.977

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आप में से बहुत से लोगों ने सुना होगा कि कुछ लोगों की कुंडली में मंगल दोष होता है, जिस कारण उनके जीवन में खई समस्याएं पैदा हो जाती है। सबसे ज्यादा जो परेशानी देखने मिलती है वो है कुंडली में मांगलिक दोष के चलते शादी होने में देरी। जी हां, कहा जाता है जिस किसी की कुंडली में मंगल दोष होता है, उस व्यक्ति का विवाह होने में अधिक विलंब होता है। मगर बहुत कम लोग हैं जो ये जानते हैं कि आखिर कुंडली में किन स्थितियों में मंगल दोष पैदा होता है और किन स्थितियों में नहीं। तो अगर आप नहीं जानते तो आइए हम आपको बताते हैं कि मंगल ग्रह कुंडली में कब पापी नहीं होता। 

अगर मंगल मेष, वृश्चिक, मकर तथा कर्क राशि में स्थित है तथा यह राशि कुंडली में चतुर्थ या सप्तम भाव में पड़ता हो तो मंगल दोष नहीं लगता।

उपरोक्त चार राशियों में स्थित होकर मंगल प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित हो तो भी मंगल दोष नहीं लगता।

अगर मंगल, बुध या बृहस्पति के साथ स्थित हो तो प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, अष्टम तथा द्वादश भाव में मंगल पापी नहीं होता।

अगर द्वितीय भाव में मेष, वृश्चिक, मिथुन तथा कन्या राशि हो तो भी मंगल दोष नहीं लगता।

अगर मंगल शुक्र की राशि तुला या वृष या अपनी राशि मेष या वृश्चिक में स्थित होकर चतुर्थ भाव में हो तो मंगल दोष नहीं होता।

मंगल सप्तम भाव में पापी होता है। अगर सप्तम में मेष, कर्क, वृश्चिक तथा मकर राशि हो तो मंगल पापी नहीं रह जाता।

अगर अष्टम भाव में वृहस्पति की राशि धनु या मीन हो या मंगल अष्टम में कर्क या मकर राशि में स्थित हो, तब भी मंगल दोष नहीं होता।

अगर द्वादश भाव बुध या शुक्र की राशि में मंगल स्थित हो तो भी मंगल दोष नहीं होता है। मिथुन तथा कन्या बुध की राशियां हैं तथा वृष एवं तुला शुक्र की राशियां होती हैं।
चंद्र अगर मंगल के साथ स्थित हो तब भी मंगल दोष नहीं होता।

उपरोक्त सभी स्थितियां मंगल की स्थिति अर्थात मांगलिक दोष को जन्म नहीं देती। -डा. दीनानाथ झा ‘दिनकर’


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Jyoti

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