Mahashivratri 2026 Vrat Rules: महाशिवरात्रि के दिन भूलकर भी न करें ये 8 गलतियां, वरना नहीं मिलेगा पूजा का फल
punjabkesari.in Friday, Feb 13, 2026 - 09:48 AM (IST)
Mahashivratri 2026 Vrat Rules: हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी 2026, रविवार को रखा जाएगा। यह पर्व भगवान शिव को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण और पावन त्योहारों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था।
इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर, रात्रि जागरण कर तथा शिवलिंग का जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा में महाशिवरात्रि को आध्यात्मिक उन्नति और मनोकामना पूर्ति का दिन माना गया है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई शिव आराधना से कष्टों का नाश होता है, पापों का क्षय होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। हालांकि शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि शिव पूजा के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। यदि इन नियमों की अनदेखी की जाए तो पुण्य के स्थान पर दोष भी लग सकता है।

महाशिवरात्रि पर भूलकर भी न करें ये गलतियां
केतकी का फूल अर्पित न करें
पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा से वर्जित कर दिया था। इसलिए शिवलिंग पर इसे अर्पित करना निषिद्ध माना गया है।
सिंदूर या कुमकुम न चढ़ाएं
भगवान शिव वैरागी स्वरूप में पूजित हैं। सिंदूर और कुमकुम सौभाग्य के प्रतीक हैं और मुख्यतः देवी पूजा में प्रयुक्त होते हैं। शिवजी पर भस्म अर्पित करना अधिक शुभ माना गया है।
तुलसी दल का प्रयोग न करें
तुलसी का विशेष संबंध भगवान विष्णु से माना जाता है। शिव पूजा में तुलसी चढ़ाना शास्त्रों में वर्जित बताया गया है। इसके स्थान पर बेलपत्र अर्पित करना श्रेष्ठ माना गया है।
हल्दी अर्पित करने से बचें
हल्दी का संबंध स्त्री सौंदर्य और मांगलिकता से है, जबकि शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक है। इसलिए शिवलिंग पर हल्दी चढ़ाना उचित नहीं माना जाता।

बेलपत्र चढ़ाने का सही नियम
हमेशा तीन पत्तियों वाला बेलपत्र ही चढ़ाएं।
पत्तियां कटी-फटी या सूखी नहीं होनी चाहिए।
बेलपत्र का चिकना भाग शिवलिंग की ओर रखें।
बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना गया है और सही विधि से अर्पित करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है।
शंख से जल अर्पित क्यों नहीं करना चाहिए?
शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक असुर का वध किया था। इसी कारण शिव पूजा में शंख का प्रयोग वर्जित माना जाता है।
शिवलिंग का अभिषेक तांबे या पीतल के लोटे से करना शुभ माना गया है।
खान-पान और आचरण से जुड़ी सावधानियां
तामसिक भोजन से परहेज
महाशिवरात्रि के दिन प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।
काले वस्त्र न पहनें
पूजा के दौरान काले रंग के कपड़े पहनने से बचें। हरा, सफेद और पीला रंग शुभ माना गया है।
क्रोध और कलह से बचें
इस दिन किसी का अपमान न करें और घर में विवाद से बचें। मन को शांत और संयमित रखना ही सच्ची शिव भक्ति है।
शिवलिंग की पूरी परिक्रमा क्यों नहीं की जाती?
अक्सर श्रद्धालु उत्साह में शिवलिंग की पूरी परिक्रमा कर लेते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग की पूर्ण परिक्रमा नहीं करनी चाहिए।
जहां से अभिषेक का जल बाहर निकलता है (जिसे जलाधारी या निर्मली कहा जाता है), उसे लांघना अशुभ माना जाता है। इसलिए वहीं से वापस मुड़ जाना चाहिए।
महाशिवरात्रि का पर्व केवल व्रत और पूजा का ही नहीं, बल्कि अनुशासन, संयम और श्रद्धा का भी प्रतीक है। यदि विधि-विधान से भगवान शिव की आराधना की जाए और शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन किया जाए, तो भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इस महाशिवरात्रि पर नियमपूर्वक पूजा करें और शिव कृपा प्राप्त करें।

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