Mahashivratri Vrat Niyam 2026: महाशिवरात्रि व्रत के नियम क्या हैं? जानें व्रत टूट जाए तो क्या करें और सही प्रायश्चित विधि
punjabkesari.in Thursday, Feb 12, 2026 - 09:40 AM (IST)
Mahashivratri Vrat Todne Par Kya Kare: 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी महाशिवरात्रि। जानिए व्रत के आवश्यक नियम, पूजा विधि, तिथि-समय और यदि अनजाने में व्रत खंडित हो जाए तो क्या करें।

Mahashivratri 2026 Date and Tithi
हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी 2026 (रविवार) को मनाया जाएगा।
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 15 फरवरी 2026, शाम 05:04 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 16 फरवरी 2026, शाम 05:34 बजे
निशिता काल पूजा: मध्यरात्रि का समय विशेष फलदायी माना जाता है।
महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के पावन मिलन का पर्व है। इस दिन रखा गया व्रत आत्म-अनुशासन, संयम और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है।

Mahashivratri Vrat Niyam 2026: महाशिवरात्रि व्रत के मुख्य नियम
महाशिवरात्रि का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को निम्न नियमों का पालन करना चाहिए:
दिनचर्या और शुद्धता
प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
स्वच्छ और हल्के (अधिकतर सफेद) वस्त्र धारण करें।
घर के मंदिर या शिवालय में विधिपूर्वक पूजा करें।
आहार संबंधी नियम
तामसिक भोजन (लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा) से पूरी तरह परहेज करें।
यदि फलाहार व्रत रखें तो फल, दूध, मखाना, साबूदाना और सेंधा नमक का सेवन करें।
कई श्रद्धालु निर्जला व्रत भी रखते हैं, लेकिन यह अपनी क्षमता अनुसार ही करें।
आचरण और मनोवृत्ति
ब्रह्मचर्य का पालन करें।
क्रोध, द्वेष और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
पूरे दिन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ करना शुभ माना जाता है।
अगर अनजाने में टूट जाए व्रत तो क्या करें?
कई बार स्वास्थ्य कारणों या भूलवश व्रत खंडित हो जाता है। ऐसी स्थिति में घबराने की आवश्यकता नहीं है।
अपनाएं ये उपाय:
सबसे पहले मन को शांत रखें और भगवान शिव से सच्चे हृदय से क्षमा याचना करें।
पुनः स्नान कर शिवलिंग का गंगाजल या दूध से अभिषेक करें।
“ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें।
शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव अत्यंत भोले और दयालु हैं। वे भक्त की भावना को प्रधान मानते हैं, न कि औपचारिक त्रुटियों को।
व्रत खंडित होने पर करें ये प्रायश्चित उपाय
जरूरतमंद व्यक्ति को सफेद वस्तुओं (चावल, दूध, सफेद वस्त्र) का दान करें।
मंदिर में दीपदान करें।
सायंकाल शिव आरती अवश्य करें।
इन उपायों से मानसिक शांति मिलती है और आत्मविश्वास पुनः स्थापित होता है।
सेहत और श्रद्धा के बीच संतुलन जरूरी
महाशिवरात्रि का व्रत आत्मशुद्धि के लिए है, न कि शरीर को कष्ट देने के लिए।
यदि आप बीमार, बुजुर्ग या गर्भवती हैं तो कठोर व्रत के बजाय मानसिक पूजा और मंत्र जाप करें।
पर्याप्त जल पिएं और स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
धर्म में सबसे बड़ा नियम सच्ची श्रद्धा और समर्पण है।

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