117 साल बाद बन रहा महाशिवरात्रि दुर्लभ योग, शुभ मुहूर्त में करें शिव जी को प्रसन्न

2020-02-11T11:36:44.567

शास्त्रों की बात, जामें धर्म के साथ

सुबह-सुबह ले शिव का नाम
कर ले बंदे तू ये शुभ काम
शिव आएंगे तेरे काम
ॐ नम: शिवाय

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21 फरवरी, 2020 फाल्गुन माह की त्रयोदशी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। तो कुछ मान्यताओं के अनुसार ये उतस्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी मनाया जाता है। न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर में इस दिन बाबा भोलेनाथ के भक्त झूमते दिखाई देते हैं। हिंदू धर्म के समस्त ग्रंथों आदि में महाशिवरात्रि का अधिक महत्व बताया गया है। वैसे तो प्रत्येक महीने की त्रयोदशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का त्यौहार मनाया जाता है परंतु फाल्गुन माह में आने वाली शिवरात्रि को बेहद खास माने जाने का मुख्य कारण है इससे जुड़ी पौराणिक किंवदंती है। शास्त्रों में वर्णित इससे जुड़ी धार्मिक मान्यता के मुताबिक इस दिन शिव शिवलिंग रूप में अवतरित हुए थे व अन्य कथाओं के अनुसार इसी ही दिन शिव-पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन शिवलिंग के रुद्राभिषेक का खास महत्व होता है। लोग इस पर्व पर भगवान शिव का विधि-वत पूजन करते हैं तथा व्रत रखते हैं। कहा जाता है इस व्रत के प्रभाव से सभी रोग और शारीरिक दोष समाप्त हो जाते हैं। ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार की शिवरात्रि बेहद खास है तो आइए जानते हैं क्यों खास है इस साल की महाशिवरात्रि-

इसलिए खास है इस साल की महाशिवरात्रि-
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार शिवरात्रि पर 117  साल बाद शनि और शुक्र का दुर्लभ योग बन रहा है। यानि शिवरात्रि पर शनि अपनी स्वयं की राशि मकर में और शुक्र ग्रह अपनी उच्च की राशि मीन में रहेगा। जिससे एक दुर्लभ योग बन रहा है। बताया जा रहा है इससे पहले ऐसी स्थिति साल 1903  में बनी थी। ज्योतिषियों का कहना है कि इस योग में भगवान शिव की आराधना करने पर शनि, गुरू तथा शुक्र के दोषों से मुक्ति मिलती है। साथ ही साथ ये समय किसी भी प्रकार के नए काम को करने की शुरुआत के लिए बहुत शुभ माना जा रहा है।
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शुभ मुहू्र्त-
महा शिवरात्रि शुक्रवार, फरवरी 21, 2020 को

निशिता काल पूजा समय - 24:07+ से 24:56+

अवधि - 00 घण्टे 49 मिनट्स

22वां फरवरी को, शिवरात्रि पारण समय - 06:41 से 15:26

रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - 18:21 से 21:26

रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय - 21:26 से 24:31+

रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - 24:31+ से 27:36+

रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - 27:36+ से 30:41+

चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ - फरवरी 21, 2020 को 17:20 बजे

चतुर्दशी तिथि समाप्त - फरवरी 22, 2020 को 19:02 बजे

कहा जाता है कि अगर शिव भक्त उपरोक्त मुहूर्त के मद्देनज़र भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा करते हैं तो उन्हें मनचाहा वरदान प्राप्त होता है।

शिव का जलाभिषेक
जैसे कि आप लोग जानते होंगे कि शिव जी के जलाभिषेक का हिंदू धर्म में बहुत महत्व हैं। इसीलिए शिवालयों में हर समय भीज़ लगी रहती है। महाशिवरात्रि के दिन इनका बिल्वपत्र, शहद, दूध, दही, शक्कर, धतूरा और गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए। इसके अलावा कहा जाता है अगर इस दिन भोलेनाथ को मुर्दे की भस्म लगाई जाए तो वह और भी प्रसन्न होते हैं।
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शिवरात्रि का पौराणिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस पावन रात्रि यानि महाशिवरात्रि को भगवान शिव ने संरक्षण और विनाश का सृजन किया था तथा इसी दिन शिव-पार्वती का विवाह भी संपन्न हुआ था। कुछ मान्यताओं  की मानें तो शिव तथा आदि शक्ति के मिलन की रात को ही शिवरात्रि कहा जाता है। माना जाता है शिवरात्रि की रात आध्यात्मिक शक्तियां जागृत होती हैं।

 


Jyoti

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