Kasel Shiv Mandir : अमृतसर के पास स्थित कसेल धाम, जहां 20 फुट खुदाई के बाद भी खत्म नहीं होता शिवलिंग

punjabkesari.in Thursday, Mar 05, 2026 - 01:56 PM (IST)

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Kasel Shiv Mandir :  भारत की आत्मा उसके गांवों में बसती है और उन गांवों की आत्मा वहां स्थित देवालयों में झलकती है। पंजाब की पावन धरती भी केवल वीरता और पराक्रम की गाथाओं के लिए ही नहीं बल्कि अपनी समृद्ध धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए भी जानी जाती है।

भोलेनाथ के 4 मंदिरों- काशी, कलानौर, काबा और कसेल का अत्यधिक  महत्व माना जाता है। इनमें से ही एक कसेल मंदिर अमृतसर से लगभग 22 किलोमीटर दूर सीमावर्ती तरनतारन जिले के कसेल गांव में स्थित है। त्रेता युग का यह प्राचीन शिव मंदिर भगवान शिव की आराधना का एक प्राचीन और आस्था-प्रधान केंद्र है।

Kasel Shiv Mandir

सनातन परंपरा में भगवान शिव को आदिदेव कहा गया है जो सृष्टि के संतुलन, तपस्या और करुणा के प्रतीक हैं। इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग को भक्त शक्ति, शांति और कल्याण का स्रोत मानते हैं। कसेल शिव मंदिर अपनी सरल वास्तुकला और शांत वातावरण के कारण विशेष पहचान रखता है। यहां स्थापित भगवान भोलेनाथ का शिवङ्क्षलग सनातन धर्म में सृजन, संहार और संतुलन का प्रतीक माना जाता है।

भक्तजन मानते हैं कि यहां भोलेनाथ की उपासना करने से जीवन के कष्ट, भय और मानसिक तनाव दूर होते हैं। इसका इतिहास लिखित रूप में सीमित है लेकिन स्थानीय जनमान्यताओं के अनुसार कसेल शिव मंदिर में स्थित  शिवलिंग स्वयंभू है जो 18-20 फुट खुदाई करने के बाद भी नीचे तक है। शिवलिंग के ध्यान से दर्शन करने पर इसमें गणेश जी नंदिगन जी के दर्शन होते हैं।

दंत कथाओं के अनुसार भगवान श्री राम की माता कौशल्या इसी मंदिर में पूजा करती थीं इसलिए कुछ लोग इसे श्रीराम का ननिहाल भी मानते हैं। एक अन्य कथा के अनुसार इस मंदिर का महाराजा रणजीत सिंह जी के शासनकाल से भी संबंध है।  एक बार जब वह लाहौर से अमृतसर आ रहे थे तो यहां रुके और यहां के प्राचीन कुएं का जल ग्रहण किया था।

Kasel Shiv Mandir

कहते हैं कि उनका पेट खराब रहता था और इस प्राचीन कुएं का जल पीने से उन्हें राहत महसूस हुई थी। इसके बाद उनके पीने के लिए जल यहां से जाने लगा। वह प्राचीन कुआं आज भी मंदिर परिसर में मौजूद है जहां से जल दूर-दूर से आए श्रद्धालु ले कर जाते हैं। महाराजा रणजीत सिंह ने खुश होकर कुछ जमीन मंदिर के नाम करवा दी जिसमें से कुछ आज भी मंदिर के नाम है। इसके साथ ही उन्होंने 1800 जागीर मंदिर के नाम लगवाई जो 1997 में पंजाब सरकार द्वारा मालिया समाप्त करने पर बंद हुई।

मंदिर के सामने ही एक सरोवर है जो सरकारों की उपेक्षा के कारण जीर्णोद्धार की राह देख रहा है। मंदिर का श्रावण मास में विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि श्रावण के सोमवार को यहां जलाभिषेक और बेलपत्र अर्पण करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों के कष्ट दूर करते हैं।  

कसेल शिव मंदिर में जाति, वर्ग या पंथ का कोई भेद नहीं है। सभी श्रद्धालु समान भाव से पूजा करते हैं, जो भारतीय संस्कृति की एकता की भावना को दर्शाता है। गांव के युवा, मंदिर की साफ-सफाई, आयोजन और धार्मिक कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, जिससे परंपरा और संस्कार अगली पीढ़ी तक पहुंचते हैं।

Kasel Shiv Mandir
 


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Content Editor

Prachi Sharma

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