Bhumara Shiv Temple : अद्भुत एकमुख शिवलिंग वाला भूमरा मंदिर, जहां आज भी दिखती है गुप्तकाल की भव्यता
punjabkesari.in Monday, Apr 27, 2026 - 03:23 PM (IST)
Bhumara Shiv Temple : भूमरा मंदिर, जिसे भुभरा या भरकुलेश्वर के नाम से भी जाना जाता है, पांचवीं या छठी शताब्दी का गुप्त युग का पत्थरों से बना हिन्दू मंदिर है, जो मध्य प्रदेश के सतना जिले के पास स्थित है और भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर की योजना में एक गर्भगृह और मंडप शामिल हैं और यह संरचना तथा अपनी सुंदर कला के महत्वपूर्ण उदाहरणों के रूप में प्रसिद्ध है, जो विद्वानों के अध्ययन का हिस्सा रहे हैं। यह गुप्त काल के अन्य मंदिरों की तरह एक संलग्न संकेंद्रित परिक्रमा पथ और जटिल नक्काशीदार मूर्तियों से सज्जित है।
मंदिर में एक एकमुख लिंग है, जिस पर भगवान शिव का विस्तृत चेहरा उकेरा गया है, जो गुप्त कला का महत्वपूर्ण उदाहरण है। अन्य मूर्तियों में महिषासुर-मॢदनी, गणेश, ब्रह्मा, विष्णु, सूर्य, और अन्य देवताओं की नक्काशी शामिल है। 5वीं शताब्दी में गणेश जी की मूर्तिकला के महत्वपूर्ण उदाहरणों में से एक भूमरा मंदिर की मूर्तियों में पाई जाती है। भूमरा मंदिर के कई हिस्से को संग्रहालयों में स्थानांतरित कर दिया गया है, जिनमें कोलकाता और इलाहाबाद संग्रहालय प्रमुख हैं। 1920 के दशक में बोस्टन यूजियम ऑफ फाइन आर्ट्स ने गणेश जी की प्रसिद्ध मूर्ति को अधिग्रहित किया था।भूमरा मंदिर, उंचेहरा शहर से लगभग 19 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में, खाहा और मोहना पहाड़ियों के पास स्थित है। यह सतना शहर से लगभग 40 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम, नागोद से 35 किलोमीटर दक्षिण और कटनी से 110 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है। यह स्थल जंगलों के बीच 1,500 फुट की ऊंचाई पर स्थित है।
इतिहास
1873-1874 में अलैग्जैंडर कनिंघम ने भूमरा मंदिर का दौरा किया और शिलालेखों का अध्ययन किया। 1888 में शिलालेख का अनुवाद जॉन फेथफुल लीट ने किया, जिसमें दो राजाओं का उल्लेख था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 11-1920 में स्थल का पुन: दौरा किया और मंदिर के खंडहरों का अध्ययन किया।
मंदिर की संरचना
भूमरा शिव मंदिर एक ऊंचे मंच पर स्थित है, जिसकी ऊंचाई लगभग 1.4 मीटर (4 फुट 7 इंच) है। यह मंदिर एक चौकोर योजना में निर्मित है, जिसमें गर्भगृह और परिक्रमा पथ शामिल हैं। इसका गर्भगृह 15 फुट (4.62 मीटर) लंबा और 11 मीटर (35 फुट) चौड़ा है। इसके सामने एक स्तंभयुक्त मंडप है। मंदिर के गर्भगृह के द्वार पर जटिल नक्काशी की गई है, जिसमें देवी गंगा और यमुना का चित्रण किया गया है। शिवलिंग में भगवान शिव का मुख उत्कीर्ण किया गया है, जिसे मुखलिंग कहा जाता है। यह मूर्तिकला गुप्त कला का महत्वपूर्ण उदाहरण है। भूमरा मंदिर से प्राप्त खंडहरों में कई मूर्तियां, स्तंभ और दीवारों के टुकड़े शामिल हैं। इन मूतियों में गणेश, नटराज, काॢतकेय, सूर्य और अन्य देवताओं के चित्रण शामिल हैं।
महत्व
भूमरा मंदिर गुप्त काल की महत्वपूर्ण शैव कला और संस्कृति का प्रतीक है। यह हिंदू धर्म में गणेश जी की पूजा और उनका विभिन्न रूपों में चित्रण का सबसे पुराना उदाहरण प्रस्तुत करता है। गुप्त युग की कारीगरी और वास्तुकला के लिए भूमरा मंदिर महत्वपूर्ण स्थल है।
