क्यों राजा ने अपने ही पुत्र को दिया कठोर दंड ? जानें प्रजा के न्याय की अनोखी कहानी
punjabkesari.in Monday, May 18, 2026 - 04:02 PM (IST)
Inspirational Story : एक न्यायप्रिय राजा का दरबार लगा था। दरबान ने आकर उन्हें बताया कि राज्य में कुछ प्रमुख लोग उनसे भेंट करना चाहते हैं। महाराजा ने उन्हें दरबार में बुलवा लिया। राजा ने हाल-चाल पूछा तो उनमें से एक रो पड़ा।
महाराजा को समझते देर न लगी कि ये सब किसी दुख से पीड़ित होकर आए हैं। महाराजा ने कहा, ‘‘आप नि:संकोच बताइए कि आपको मेरे राज्य में क्या कष्ट है।’’
एक वृद्ध ने कहा, ‘‘महाराज आप तो प्रजा को पुत्रों की तरह स्नेह और संरक्षण देते हैं परन्तु आपके पुत्र ने राज्य में हमारा रहना दूभर कर दिया है। वह शाम को नदी के तट पर पहुंचते हैं और अबोध बालकों को नदी की उफनती धार में फैंक देते हैं। जब डूबते बालक रोते हैं तो राजकुमार जोर से हंसते हुए अपना मनोरंजन करते हैं।’’
सुनते ही महाराजा का चेहरा गुस्से से लाल हो उठा। उन्होंने कहा, ‘‘आप सभी निश्चिंत होकर अपने-अपने घर लौट जाइए। आप सबको न्याय जरूर मिलेगा।’’
महाराजा दरबार से महल में पहुंचे। उन्होंने राजकुमार को अपने पास बुलवाया। वह बोले, ‘‘तुम राजकुमार हो या जल्लाद। तुम प्रजाजनों के निर्दोष बच्चों को नदी में फैंक कर मनोरंजन करते हो। मेरे राज्य में ऐसा क्रूर व्यक्ति एक क्षण भी नहीं रह सकता।’’
राजकुमार भय से कांपने लगा। वह हाथ जोड़कर बोला, ‘‘पिता जी, क्षमा करें भविष्य में ऐसा पाप नहीं करूंगा।’’
राजा बोले, ‘‘कई अनेक अबोध बच्चे तुम्हारे इस क्रूरतापूर्ण मनोरंजन के शिकार बन चुके हैं। मैं ऐसे क्रूर युवक को अपना पुत्र मानकर संरक्षण नहीं दे सकता।’’ राजा ने राजकुमार को तुरन्त राज्य से निष्कासित कर दिया।
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