Inspirational Context : जीवन का असली उद्देश्य क्या है ? इस एक काम में छिपा है पूरा उत्तर

punjabkesari.in Thursday, Mar 12, 2026 - 12:17 PM (IST)

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Inspirational Context : एक राज्य में भीषण अकाल पड़ गया। वहां के राजा ने खजाने से काफी धन खर्च किया। कई तरह के प्रयास किए , लेकिन प्रजा की तकलीफ कम नहीं हुई। उन्होंने राज्य के मंत्रियों की सभा बुलाई, जिसमें कई सुझाव आए। 

एक मंत्री ने कहा, ‘‘नंदीवर्धन पुर के नगर सेठ धनवान तथा धर्मात्मा हैं। वह अवश्य मदद करेंगे। किंतु इसके लिए राजा की ओर से उनसे विनती करनी होगी।’’

कुछ मंत्रियों को यह सुझाव ठीक नहीं लगा। पर राजा अत्यंत उदार और प्रजापालक थे। 

उन्होंने सभी का संकोच तोड़ते हुए कहा, ‘‘लोकहित के लिए किसी से मांगने में शर्म कैसी ?

 यदि सेठ से निवेदन करने पर प्रजा की रक्षा हो जाए, तो इससे अच्छी बात और क्या होगी ?’’ 

राजा के आदेश पर मंत्री और राज्य कर्मचारी नंदीवर्धन पुर के चौराहे पर पहुंचे और लोगों से सेठ का पता पूछा। वहां जाकर देखा कि सेठ की हवेली के आगे एक व्यक्ति पशुशाला की सफाई कर रहा था।

मंत्री ने कड़क आवाज में कहा, ‘‘सेठ से जाकर कहो कि राज्य के मंत्री मिलने आए हैं।’’ वह व्यक्ति अंदर गया और साफ-सुथरी पोशाक पहन कर बाहर आया तथा मंत्री महोदय के सामने हाथ-जोड़  कर बोला, ‘‘आप संदेश भिजवाते, तो मैं स्वयं आपकी सेवा में हाजिर हो जाता। बताइए मेरे लिए राजा का क्या हुकम है ?’’

मंत्री महोदय यह जानकर लज्जित हो गए कि उन्होंने सेठ को मजदूर समझा। 

वह झिझकते हुए बोले, ‘‘जैसा कि आप भी जानते हैं कि राज्य में अकाल पड़ा है। खजाना खाली हो चुका है और...।’’ बीच में ही बात को काटते हुए सेठ बोल पड़े, ‘‘महाराज ने आपको कुछ सहयोग पाने के लिए मेरे पास भेजा । 

महाराज ने इतनी छोटी-सी बात के लिए आपको यहां भेजा। वह दरबार में बैठे हुए आज्ञा देते, तो भी यह सेवक तैयार था। मेरे पास जो कुछ भी है, वह सब राज्य का ही तो है। मानवता की सेवा में ही जीवन की सार्थकता है।’’ सेठ की दानशीलता सिखाती है कि समाज की भलाई के लिए सम्पत्ति का उपयोग किया जाना चाहिए।


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Content Editor

Prachi Sharma

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