Happy Lohri 2020: लोहड़ी के अगले दिन देशभर में अलग अंदाज़ में मनाई जाती है मकर संक्रांति

2020-01-13T07:32:09.153

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
Happy Lohri: भारत को अपनी प्राचीनता के साथ-साथ विविधताओं के लिए भी जाना जाता है। क्योंकि यहां किसी एक भाषा के नहीं बल्कि अलग-अलग विविध संस्कृतियों, धर्म आदि के लोग निवास करते हैं। जो एक तरफ़ से हमारे देश यानि भारत की एकता तो दर्शाता है। साल भर में हर दूसरे महीने यहां कोई न कोई त्यौहार पड़ जाता है जिस कारण न केवल किसी देश में किसी एक हिस्से में बल्कि पूरे देश में फैस्टिव माहौल बन जाता है। दिवाली हो या दशहरा, ईद हो या गुरपुरब, यहां के लोग हर तरह का भेदभाव भूलकर ये सभी त्यौहार मनाते हैं। इन्हीं में से एक त्यौहार है मकर संक्रांति का त्यौहार जिस मनाया तो लगभग देश के हर कोने में हैं परंतु इस मनाने की परंपराएं सभी की विभिन्न मानी जाती हैं। लोहड़ी के इस खास मौके पर हम आपको यहीं बताने जा रहे हैं कि देश के विभिन्न जगहों पर इस त्यौहार को कैसे मनाया जाता है।
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जैसे कि सब जानते हैं कि हर साल माघ महीने में मकर संक्रांति का त्यौहार मनाया जाता है। जिसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। कहीं पर तिल के लड्डुओं के साथ तो कहीं पर पतंगों के साथ इसे सेलिब्रेट किया जाता है। तो वहीं कई राज्यों में परंपरा है कि इस दिन सुबह उठते ही घर के बड़ों और धरती माता का आशीर्वाद लिया जाता है।

यहां जानें इस दिन को कहां कैसे सेलिब्रेट किया जाता है-
उत्तरायन

गुजरात की बात करे तो यहां पर इस दिन को लेकर जो मान्यता सबसे ज्यादा मशहूर है वो है पतंगें उड़ाना। यहां के लोग इस दिन यहां आसमान में रंग बिरंगे पतंगें उड़ाकर सेलिब्रेशन करते हैं। इसके अलावा लाजवाब डिशेज बनाकर एक-दूसरे को खिलाई जाती है। ठंडी के अंत में आने वाले इस त्योहार में लोग अपने घर की छतों पर पतंगें उड़ाते हैं।
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लोहड़ी
पंजाब में यह त्योहार रबी फसल के पैदा होने के अवसर पर मनाया जाता है जो पंजाब की मुख्य परंपराओं में से एक है। बता दें लोहड़ी का मूल शब्द लोह से बना है जिसका अर्थ है लाइट होता है यानि  प्रकाश। यही कारण है कि इस त्योहार पर लकड़ियां जलाकर उनके चारों तरफ घूम-घूम कर नाच-गाना किया जाता है।  
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पोंगल
तमिलनाडु में चार दिनों का यह त्यौहार पोंगल के नाम से प्रसिद्ध है। इस दिन सूर्य भगवान के साथ-साथ धरती माता की पूजा की जाती है। यह इवेंट दूसरे दिन थाई पोंगल की तरह मनाया जाता है। इस दिन एक ग्राउंड के बीचोबीच एक स्क्वायर पिच बनाई जाती है जहां पर सूरज की किरणें सीधी आती हों। वहां जलती हुई लकड़ियों पर एक बर्तन रखा जाता है जिसपर मीठा पोंगल बनाया जाता है।
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बिहू
असम में इसे बिहू के रूप में मनाया जाता है, जो यहां के प्रमुख त्यौहारो में से एक माना जाता है। बता दें इसे भोगली और मघ बिहू भी कहा जाता है। यह त्योहार लगभग एक सप्ताह तक मनाया जाता है। बच्चे और बड़े मिलकर लकड़ियों के छोटे-छोटे घर बनाते हैं जिसे मेजू और भेला घर कहा जाता है। दिलचस्प बात ये है कि अगले दिन सभी मिलकर इस घर को जला देते हैं। त्योहार यहीं नहीं खत्म होता, इसके बाद चावल और मीठे लारु (नारियल की बनी मिठाई) के साथ केक बनाया जाता है जिसे काटकर बिहू सेलिब्रेट किया जाता है।
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Jyoti

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