Dhumavati Jayanti 2026 : मां धूमावती को नमकीन भोग क्यों लगाया जाता है, जानें इसके पीछे की पौराणिक कथा

punjabkesari.in Wednesday, Jun 10, 2026 - 10:19 AM (IST)

Dhumavati Jayanti 2026 : हिंदू धर्म में दस महाविद्याओं का बहुत खास महत्व है। इन्हीं दस महाविद्याओं में से सातवीं महाविद्या मां धूमावती को माना जाता है। हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को धूमावती जयंती मनाई जाती है। इस साल यह पावन पर्व 23 जून 2026 को मनाया जा रहा है। माना जाता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ मां धूमावती की पूजा करने से सभी कष्टों, रोगों और शत्रुओं का नाश होता है और जीवन से भय और नेगेटिव शक्तियों से भी मुक्ति मिलती है। मां धूमावत की पूजा से जुड़े कई रहस्य हैं, जिनमें से एक है उन्हें नमकीन भोग चढ़ाना। इस सवाल को लेकर कई लोगों के मन में अकसर सवाल उठता है कि क्यों मां धूमावती को मिठाई के भोग की जगह नमकीन भोग लगाया जाता है। तो आइए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा के बारे में-

Dhumavati Jayanti 2026

मां धूमावती को नमकीन भोग क्यों चढ़ाया जाता है?
हिंदू धर्म में हर देवी-देवताओं को मिठाई जैसे- लड्डू, पेड़ा या खीर जैसी मीठी चीजों का भोग लगाया जाता है। लेकिन वहीं मां धूमावती एक ऐसी देवी हैं, जिन्हें मिठाई की जगह नमकीन जैसे- नमकीन मठरी, या भुने हुए चने का भोग लगाया जाता है। मां धूमावती का स्वरूप एक वृद्ध, विधवा स्त्री का है जो सफेद वस्त्र धारण करती हैं और कौए के रथ पर सवार हैं। वे संसार के सभी दुखों, दरिद्रता और वैराग्य की देवी हैं। मीठा स्वाद सांसारिक सुखों और मोह-माया का प्रतीक है, जबकि नमकीन या कड़वा स्वाद जीवन के संघर्षों और वैराग्य को दर्शाता है। यहीं कारण है कि मां धूमावती को नमकीन भोग लगाया जाता है। माना जाता है कि मां धूमावती को नमकीन भोग लगाने से वह जल्द प्रसन्न होती हैं और जीवन में आने वाली सारी परेशानियों से छुटकारा मिलता है।  

Dhumavati Jayanti 2026

कैसे हुई मां धूमावती की उत्पत्ति ? 
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार माता पार्वती को बहुत तेज भूख लगी हुई थी। उन्होंने भगवान शिव से भोजन की मांग की। देवों के देव महादेवने माता पार्वती को कुछ समय इंतजार करने को कहा और फिर से ध्यान में लीन हो गए। लेकिन बहुत समय इंतजार करने के बाद भोजन न मिलने पर मां पार्वती बहुत क्रोधित हो गई और भूख से व्याकुल होकर माता पार्वती ने सांस खींचकर स्वयं भगवान शिव को ही निगल लिया। इसके बाद माता पार्वती के शरीर से धुएं का एक विशाल गुबार निकलने लगा।  उसी धुएं से मां धूमावती प्रकट हुई। 

महादेव ने उनके पेट के भीतर से ही लीला रची, जिसके बाद माता ने उन्हें पुनः बाहर निकाला। तब भगवान शिव ने माता से कहा कि चूंकि तुमने भूख के कारण अपने पति को ही निगल लिया, इसलिए अब से तुम विधवा स्वरूप में पूजी जाओगी। तुम्हारा एक नाम धूमावती होगा  महादेव ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि जो भी भक्त संकट के समय तुम्हारी शरण में आएगा, उसके सभी शत्रुओं और दुखों का नाश होगा।

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Content Editor

Sarita Thapa

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