यहां स्थापित है भगवान गणेश की अद्भुत प्रतिमा, जानें रहस्य

2020-03-11T15:47:42.267

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बुधवार का दिन भगवान गणेश जी की पूजा का दिन माना जाता है। कहते हैं कि इस दिन गणेश मंदिर में जाकर इनकी आराधना करने से व्यक्ति के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। पूरे देश में इनके कईं मंदिरों के बारे में बहुत से लोगों ने सुना होगा। किंतु वहीं इनके कुछ ऐसे चमत्कारी मंदिर स्थापित हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग ही जानते होंगे। चलिए आज हम आपको एक ऐसे स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां भगवान की गोबर की मूर्ति विराजमान है। जी हां, सुनने व पढ़ने में अजीब गलने वाली बात सच है। 
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मध्यप्रदेश के महेश्वर में गजानन की गोबर की मूर्ति है और ये मूर्ति हजारों साल पुरानी है। कहते हैं यहां नारियल चढ़ाकर बप्पा से मनचाहा वरदान पाया जा सकता है। यहां स्थापित प्रतिमा में बप्पा का मनमोहक रूप, अपने भक्तों के हर दुख दर्द का इलाज करता है। गणपति का ये रुप मन मोह लेता है और हैरान भी करता है क्योंकि यहां गणपति को गोबर गणेश के नाम से पुकारते हैं। बता दें कि माहेश्वर में महावीर मार्ग पर बनी गणपति की ये प्रतिमा गोबर और मिट्टी से बनी है जिसमें एक बड़ा हिस्सा गोबर का है।
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आमतौर पर पूजा-पाठ में हम गोबर के गणपति बनाकर उनकी पूजा अर्चना करते हैं। शास्त्रों में  बताया भी है कि गोबर में मां लक्ष्मी साक्षात वास करती हैं, इसलिए गोबर गणेश मंदिर में आने वाले भक्तों की मान्यता है कि यहां दर्शन करने से भक्तों को भगवान गणेश के साथ मां लक्ष्मी का भी आशीर्वाद मिलता है। बप्पा की प्रतिमा के साथ ही मंदिर का आकार भी भक्तों को हैरान करता है एक तरफ जहां मंदिर का बाहरी आकार किसी मस्जिद के गुंबद की तरह है वहीं मंदिर के अंदर की बनावट लक्ष्मी यंत्र की तरह लगती है। कहते हैं औरंगजेब के शासन काल में इस मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाने का प्रयास किया गया था जिसके कारण मंदिर के गुंबद का आकार मंदिर की तरह न होकर मस्जिद जैसा है।
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मंदिर में भगवान अपनी दोनों पत्नियों रिद्धि-सिद्धि संग अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। भक्तों का भी मानना है कि यहां आने से गणपति सभी भक्तों की इच्छा पूरी कर देते हैं। यही वजह है कि भक्त यहां उल्टा स्वास्तिक बनाकर भगवान तक पहुंचाते हैं अपनी फरियाद और मनोकामना पूरी होने के बाद यहां आकर सीधा स्वास्तिक बनाना नहीं भूलते। 


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