Ghar me shivling rakhne ke niyam : घर में शिवलिंग रखने की सोच रहे हैं तो पहले जान लें ये 5 जरूरी बातें
punjabkesari.in Saturday, May 09, 2026 - 12:24 PM (IST)
Ghar me shivling rakhne ke niyam : सनातन धर्म में शिव जी की पूजा करना बहुत फलदायी और शुभ माना जाता है। माना जाता है कि शिव जी ही एक ऐसे देवता है, जिन्हें प्रसन्न करना सबसे आसान है। वह भक्त द्वार चढ़ाएं गए एक लौटे चल सी खुश हो जाते हैं और उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। कुछ लोग शिव जी की कृपा पाने के लिए घर में शिवलिंग स्थापित करते हैं। अगर आप भी अपने घर में शिवलिंग स्थापित करने की सोच रहे हैं या पहले से आपके घर में शिवलिंग मौजूद है, तो इस बहुत शुभ माना जाता है। शिवलिंग स्थापित करने से पहले कुछ विशेष नियमों का पालन करना भी बहुत जरूरी है। आज न सिर्फ शास्त्रों के नियमों की बात करेंगे, बल्कि उन अनसुने फैक्ट्स को भी जानेंगे जो अक्सर लोग भूल जाते हैं।
शिवलिंग के आकार कैसा होना चाहिए?
शास्त्रों के अनुसार, घर में रखा जाने वाला शिवलिंग आपके अंगूठे के पोर से बड़ा नहीं होना चाहिए। बड़ा शिवलिंग अक्सर मंदिरों के लिए होता है क्योंकि उसकी ऊर्जा को संभालने के लिए कड़े तप और नियमों की आवश्यकता होती है, जो गृहस्थ जीवन में कठिन हैं।
क्या घर में शिवलिंग रखने से पहले प्राण-प्रतिष्ठा ज़रूरी है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर के शिवलिंग के लिए प्राण-प्रतिष्ठा अनिवार्य नहीं है, लेकिन इसकी मर्यादा बनाए रखना ज़रूरी है। अगर आपने शिवलिंग रखा है, तो उसे कभी भी सूना न छोड़ें। रोजाना जल चढ़ाना, अभिषेक करना और धूप-दीप दिखाना अनिवार्य है। याद रखें, महादेव भाव के भूखे को हैं ही, उसके साथ अनुशासन के प्रिय भी।
घर में शिवलिंग की सही दिशा?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, शिवलिंग को हमेशा उत्तर-पूर्व में ही रखना चाहिए। यह दिशा सबसे पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र मानी जाती है। इससे घर में बरकत आती है और क्लेश खत्म होते हैं।
घर में कभी भी अकेला शिवलिंग न रखें
शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग के साथ माता पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय जी का चित्र या मूर्ति ज़रूरी है। शिव जब परिवार के साथ होते हैं, तभी घर में पारिवारिक संतुलन और सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही, घर में एक से अधिक शिवलिंग रखना अशुभ माना जाता है, क्योंकि इससे ऊर्जा का टकराव हो सकता है।
इन चीजों का रखने खास ध्यान
शिवलिंग पर कभी भी हल्दी और केतकी के फूल न चढ़ाएं, क्योंकि ये महादेव को वर्जित हैं।
जल चढ़ाते समय जलधारा उत्तर दिशा की ओर गिरे, यह सबसे शुभ होता है।
पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का जाप आपके चारों ओर एक सुरक्षा कवच बना देता है।

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