इस गणेश चतुर्थी बच्चों को जरूर सिखाएं ये 5 अच्छी आदतें, भविष्य होगा बेहतर
punjabkesari.in Sunday, Sep 13, 2026 - 11:48 AM (IST)
Ganesh Chaturthi Parenting Tips : सनातन धर्म गणेश चतुर्थी का त्योहार पूरे देश में बहुत धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। गणेश तुर्थी का त्योहार केवल मौदक खाने, ढोल-नगाड़ों और पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं। विघ्नहर्ता गणेश जी को बुद्धि, विवेक और समृद्धि के प्रतीक हैं। बचपन में बच्चों को दिए गए संस्कार उनके पूरे जीवन की नींव बनते हैं। इस पावन अवसर पर यदि हम अपने बच्चों को बप्पा के जीवन और उनके स्वरूप से जुड़ी कुछ आदते सिखाएं, तो उनका भविष्य न केवल संवर जाता है, बल्कि वे एक बेहतर इंसान भी बन सकते हैं।

इस गणेश चतुर्थी पर अपने बच्चों में यह 5 अच्छी आदतों जरूर सिखाएं
बप्पा की तरह ध्यान से सुनना सीखें
भगवान गणेश का बड़ा सिर और उनके बड़े कान हमें सिखाते हैं कि बोलने से पहले सुनना और समझना बहुत जरूरी है। अपने बच्चों को अभ्यास कराएं कि वे दूसरों की बात बीच में काटे बिना, ध्यान से सुनें। जो बच्चा दूसरों की बातों को अच्छे से सुनता है, वह पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करता है और दूसरों की भावनाओं को आसानी से समझ पाता है।
माता-पिता और बड़ों का सम्मान करना
जब पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करने की बात आई, तो बप्पा ने अपने माता-पिता के चक्कर लगाकर यह सिद्ध किया था कि उनके लिए माता-पिता ही पूरा संसार हैं। बच्चों को समझाएं कि अपने माता-पिता, गुरुओं और बड़ों का आदर करना सबसे बड़ा कर्तव्य है। घर के बुजुर्गों की मदद करना और उनका आशीर्वाद लेना ही सफलता की असली कुंजी है।

कठिन परिस्थितियों में भी रास्ता निकालना
श्री गणेश का छोटा वाहन मूषक यह संदेश देता है कि साधन चाहे कितने भी छोटे हों, सही बुद्धि और चतुराई से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। जब बच्चे किसी काम में हार जाएं या परेशान हों, तो उन्हें तुरंत बना-बनाया हल देने के बजाय खुद दिमाग लगाने के लिए प्रेरित करें। उन्हें सिखाएं कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, धैर्य और समझदारी से हर मुश्किल का हल निकल सकता है।
अनुशासन और खान-पान में संतुलन
गणेश जी को मोदक और मिठाइयां बहुत पसंद हैं, लेकिन वे संयम और अनुशासन के भी प्रतीक हैं। बच्चों को सिखाएं कि अपनी पसंद की चीजें खाते समय या खेलकूद के दौरान भी सीमा और अनुशासन बनाए रखना जरूरी है। अपनी दिनचर्या, पढ़ाई और खाने-पीने में संतुलन बनाए रखना सफलता के लिए बेहद जरूरी है।
पर्यावरण का ध्यान रखना और प्रकृति से जुड़ाव
पारंपरिक रूप से गणेश जी की मूर्ति मिट्टी से बनाई जाती है, जो अंत में जल में विसर्जित होकर दोबारा प्रकृति में मिल जाती है। बच्चों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाएं। इस गणेशोत्सव उनसे मिट्टी के गणेश जी बनवाएं या पर्यावरण के अनुकूल बप्पा घर लाएं। उन्हें पेड़-पौधों की देखभाल करने और प्लास्टिक का उपयोग न करने का महत्व समझाएं।
