अजा एकादशी के दिन जरूर करें तुलसी से जुड़े ये 5 काम, विष्णु-लक्ष्मी की बनी रहेगी विशेष कृपा

punjabkesari.in Saturday, Sep 05, 2026 - 11:15 AM (IST)

Aja Ekadashi Tulsi Rules : सनातन धर्म में अजा एकदाशी का बहुत खास महत्व है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह दिन जगत के पालनहार विष्णु जी को समर्पित है। माना जाता है किइस दिन सच्चे मन से विष्णु जी की पूजा करने और उपवास रखने से जीवन में आ रही सभी परेशानियों से छुटकारा मिलता है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। तुलसी जी को भगवान विष्णु की अतिप्रिय माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, बिना तुलसी दल के श्रीहरि पूजा या भोग स्वीकार नहीं करते। इसलिए अजा एकादशी के दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए तुलसी से जुड़े इन 5 मुख्य नियमों का पालन जरूर करें।

Aja Ekadashi Tulsi Rules

एकादशी के दिन तुलसी दल न तोड़ें
शास्त्रों के अनुसार एकादशी तिथि के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना सख्त मना है। यदि आपको अजा एकादशी की पूजा और भोग के लिए तुलसी पत्रों की आवश्यकता है, तो उन्हें एक दिन पहले यानी दशमी तिथि को ही तोड़कर रख लें।

तुलसी के पौधे में जल अर्पित न करें
एकादशी के पावन अवसर पर तुलसी माता भी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इसलिए इस दिन तुलसी के पौधे में जल चढ़ाने से उनका व्रत खंडित हो जाता है। अजा एकादशी पर तुलसी जी में पानी अर्पित करने से बचें।

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संध्याकाल में दीप दान करें
अजा एकादशी की शाम को तुलसी के पौधे के समीप गाय के शुद्ध घी का दीपक अवश्य जलाएं। इसके बाद तुलसी जी की परिक्रमा करें और मां लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान विष्णु का ध्यान करें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।

स्पर्श करने से बचें
धार्मिक नियमों के अनुसार एकादशी तिथि के दिन तुलसी के पौधे को बिना वजह या अनावश्यक रूप से स्पर्श नहीं करना चाहिए। पूजा के समय दूर से ही हाथ जोड़कर प्रणाम करना शुभ माना जाता है।

भोग में शामिल करें केवल सात्विक तुलसी दल
भगवान विष्णु को अर्पित किए जाने वाले चरणामृत और मुख्य भोग में तुलसी का पत्ता जरूर रखें। ध्यान रखें कि भोग में चढ़ाया जाने वाला तुलसी दल बासी या गंदा न हो। यदि पहले से तोड़ा हुआ पत्ता है, तो उसे स्वच्छ जल से धोकर ही इस्तेमाल करें।

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Content Editor

Sarita Thapa

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