गाय भी करती हैं जीवन से वास्तु दोष दूर, क्या आप जानते हैं?

09/21/2020 1:08:34 PM

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
गाय एक ऐसा दिव्य प्राणी है कि जिस घर में यह रहती है उस घर के वास्तुदोष दूर हो जाते हैं। सभी नक्षत्रों का प्रभाव गाय पर पड़ता है। गाय में सब देवी-देवताओं का वास है। गाय को कामधेनु भी कहा गया है। हमारे प्राचीन ग्रंथ गौ महिमा से भरे पड़े हैं। गाय की रीढ़ की हड्डी के अंदर सूर्यकेतु नाड़ी होती है जो सूर्य किरणों से रक्त में स्वर्णक्षार बनाती है, यह स्वर्णक्षार गाय के दूध में विद्यमान होता है। इसी स्वर्णक्षार के कारण गाय का दूध हल्का पीलापन लिए होता है।
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गाय और भैंस में असमानता :
ऌगाय में देवी-देवताओं का वास है। गाय भगवान कृष्ण को प्रिय थी। बैल (नंदी) भगवान शिव की सवारी है। भैंस का संबंध मृत्यु के देवता यमराज से है। भैंसा यमराज की ही सवारी है।

गाय की आंखें करूणामयी होती हैं जबकि भैंस की आंखें।

महिषासुर जैसी होती हैैं। 

गाय जिस घर में रहती है उस घर से वास्तुदोष दूर हो जाते हैं जबकि भैंस को रखने से वास्तुदोष बढ़ जाते हैं।
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गाय का दूध बुद्धिवर्धक है, जबकि भैंस के दूध से बुद्धि मंद होती है।

गाय का दूध पौष्टिक, पाचक व अमृत तुल्य है, जबकि भैंस का दूध रोगकारक व पचने में भारी होता है।

गाय संवेदनशील, चुस्त व सफाई पसंद होती है, जबकि भैंस सुस्त, आलसी होती है।

गाय का दूध, मठा, मक्खन, घी आदि सभी वस्तुएं पाचक, पोषक, बलप्रदायक, कान्तिवर्धक होती हैं जबकि भैंस का दूध, मठा, मक्खन, घी आदि सभी पचने में भारी होते हैं।

गाय का मूत्र अनेक रोगों की औषधि में काम आता है, जबकि भैंस का मूत्र प्रदूषणकारक है।
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गाय का मल गोबर कहलाता है, जो खाद के रूप में काम आता है। यह चर्म रोग नाशक है और अनेक औषधियों में भी काम आता है, जबकि भैंस का मल दुर्गंधयुक्त होता है और किसी औषधि आदि में काम नहीं आता। —सुनील जैन ‘राना’


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Jyoti

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