Bharat Swastik Yatra: भारत स्वस्तिक यात्रा 8वें दिन मथुरा पहुंची, मोरारी बापू बोले- 'ब्रज में हम किसी चीज़ को नहीं छूते, यहां की हर चीज़ हमें स्पर्श करती है'
punjabkesari.in Saturday, Oct 17, 2026 - 04:05 PM (IST)
मथुरा (परविंदर कुमार मिश्रा): पूज्य संत मोरारी बापू की ऐतिहासिक 'स्वास्तिक भारत यात्रा' अपने 8वें दिन धर्मनगरी मथुरा और पावन ब्रज भूमि पहुंची। बापू के आगमन पर भारी संख्या में श्रद्धालु और साधु-संत दर्शनों के लिए उमड़ पड़े। ब्रज की पावन रज (धूल) को प्रणाम करते हुए मोरारी बापू ने कहा कि "यह ऐसी अलौकिक धरती है, जहां हम किसी चीज़ को नहीं छूते, बल्कि यहां की हर चीज़ हमें स्पर्श करती है।"
ब्रज में ठाकुर जी स्वयं कैद हैं: बापू
कथा के दौरान बापू ने कहा कि लोगों को संसार के बंधनों से मुक्त करने वाले ठाकुर जी स्वयं यहां प्रेम के बंधन में कैद हैं। वृंदावन की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि माना जाता है कि यहां लगभग 5,500 मंदिर हैं। यमुना जी, बरसाना की ऊंची अटारी वाली श्री राधा रानी, बरसाना के तीर्थ स्थान और रमनरेती की रज में रमन बिहारी जी विराजमान हैं। केवल यहां की रज को प्रणाम करने में ही 9 दिन का समय लग जाए, ऐसी यह पवित्र भूमि है।
ब्रज में राम कथा का रहस्य
एक सवाल का जवाब देते हुए बापू ने बताया, "किसी ने मुझसे पूछा कि आप ब्रज में राम कथा क्यों करते हैं? मैंने साधु वाला उत्तर दिया कि ठाकुर जी ने स्वयं कहा था, 'मोरारी बापू मुझे मेरे पूर्व जन्म की कथा (राम कथा) सुनाएं, मैं कहीं छुपकर सुनूंगा।'"
यमुना स्वच्छता और गौ सेवा का संदेश
बापू ने यमुना जी की स्वच्छता पर विशेष बल दिया और सभी को नियमित हरी नाम जप करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा, 87 हजार वर्षों का ध्यान भगवान शिव ने 87,000 वर्षों तक अचल ध्यान किया, तब जाकर 'राम नाम' की रचना हुई।
गौ सेवा की अपील: बापू ने कहा कि ब्रज के पशु-पक्षी बेहद भाग्यशाली हैं। सभी को गौ सेवा करनी चाहिए और संभव हो तो गाय पालनी चाहिए।
माता की जिम्मेदारी: हर मां का कर्तव्य है कि वह अपने पुत्र को सत्संग की ओर भेजे।
यात्रा में शुभ शकुन और स्वस्तिवाचन
यात्रा के शुभ संकेतों का उल्लेख करते हुए बापू ने कहा कि यात्रा के समय नीलकंठ पक्षी का दिखना, शीतल हवा बहना, जल का घड़ा या दही सम्मुख आना अत्यंत शुभ शकुन होता है। उन्होंने कहा कि तरक्की ज़रूर करें, लेकिन अपने मूल (जड़ों) को कभी न भूलें। अंत में आरती के साथ कथा को विराम दिया गया।
