Bharat Swastik Yatra: मोरारी बापू पहुंचे किष्किंधा, 'स्वस्तिक भारत यात्रा' के चतुर्थ दिवस पर हम्पी से दिया 12 मंगल दर्शन का संदेश, बोले- साधु की एक मुस्कान ही करा देती है मोक्ष

punjabkesari.in Tuesday, Oct 13, 2026 - 05:15 PM (IST)

हम्पी (परविंदर कुमार मिश्रा): पूज्य संत मोरारी बापू की 'स्वस्तिक भारत यात्रा' अपने चतुर्थ दिवस पर पौराणिक किष्किंधा क्षेत्र (वर्तमान हम्पी) पहुंची। उडुपी और हॉस्पेट स्टेशन से होते हुए हम्पी पहुंचे बापू ने रामकथा के दौरान इस पावन भूमि की महिमा का बखान किया। तुंगभद्रा नदी के तट और अंजनेरी पर्वत की छाया में आयोजित इस कथा में बापू जी ने जीवन को मंगलमय बनाने वाले 'स्वस्तिक के 12 मंगल दर्शन' की व्याख्या की और बताया कि कैसे साधु की मात्र एक कृपादृष्टि जीवन का कल्याण कर देती है।

किष्किंधा: जहां से शुरू हुई थी जानकी जी की खोज
कथा के दौरान बापू जी ने हम्पी की पौराणिक महिमा बताते हुए कहा कि यह वही किष्किंधा क्षेत्र है, जहां हनुमान जी का प्राकट्य (अंजनेरी पर्वत) हुआ था। यह जगतमाता भुवनेश्वरी का शक्तिपीठ है। यहीं से माता सीता और शबरी जी की खोज का आरंभ हुआ था तथा अंगद जी ने यहीं से प्रस्थान किया था। यहीं हनुमान जी ने वानर सेना की अगवानी की थी और व्याकुल सेना को उस स्थान पर ले जाकर जलपान कराया था जहां पक्षी जाते ही रूप बदल लेते थे।

स्वस्तिक के 12 मंगल दर्शन और बाल्यकाल की स्मृतियां
बापू ने बताया कि 'स्वस्तिक' के 12 अंश हैं, जो जीवन में मंगल लाते हैं:

मानस दर्शन: प्रथम दर्शन रामचरितमानस है। बापू ने अपने बाल्यकाल का स्मरण करते हुए कहा कि वे बचपन में अभावों के बीच सफेद मिट्टी में सुदर्शन चूर्ण मिलाकर होली खेलते थे। वे अपने श्रोताओं को 'पुष्प' या 'सुमन' कहकर संबोधित करते हैं।

वेद दर्शन: सनातन धर्म में वेद दर्शन उत्तम है।

गौ दर्शन: गाय विश्व की मां है। उसके चार आंचल—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष हैं। बापू ने कहा कि सात्विक श्रद्धा ही गाय है। अफ्रीका और बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था गाय पर टिकी है। श्रीकृष्ण ने भी 12 वर्षों तक गौ सेवा की थी। उन्होंने विशेष रूप से 'गीर' नस्ल की गाय का उल्लेख किया।

साधु दर्शन: साधु का दर्शन अत्यंत मंगलकारी है। एक पौराणिक दृष्टांत देते हुए बापू ने कहा कि जीवन भर गलत काम करने वाले एक व्यक्ति को भी मोक्ष मिल गया, क्योंकि एक साधु ने मात्र एक बार उसकी तरफ देखकर मुस्कुरा दिया था।

आचार्य दर्शन
देश दर्शन:
भारतीय दृष्टि लेकर यात्रा करना। स्वामी रामकृष्ण परमहंस और चैतन्य महाप्रभु इसी दृष्टि से निकले थे।
निज व गुण दर्शन: दूसरों की केवल बुराई न देखकर उनके गुणों को देखना और स्वयं का आकलन करना।
आत्म व देव दर्शन: निज दर्शन से जीव आत्म दर्शन (आदि शंकराचार्य के 'शिवोहम' भाव) तक पहुंचता है। नवरात्रि में मां चंद्रघंटा और शक्ति साधना का विशेष महत्व है।
प्रकृति दर्शन: वृक्ष, नदी, पर्वत, आकाश और जल का दर्शन। भोजन से पूर्व ईश्वर स्मरण और यह सोचना कि कोई भूखा तो नहीं रह गया।
तत्व दर्शन: कथा प्रयागराज (तीर्थराज) की ओर बढ़ती है, जहां महर्षि भारद्वाज का निवास, कुम्भ मेला और त्रिवेणी संगम की अलौकिक महिमा है।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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