Vasant Panchami: 14 वर्ष की उम्र में धर्म की रक्षा के लिए शहीद हुए बाल वीर हकीकत राय, जानें उनकी अमर गाथा

punjabkesari.in Friday, Jan 23, 2026 - 10:45 AM (IST)

Vasant Panchami 2026: वसंत पंचमी के दिन धर्म की रक्षा के लिए छोटे बालक हकीकत राय ने महान शहादत दी थी जिसकी याद में देश के कई स्थानों पर शहीदी मेले लगते हैं। वीर हकीकत राय का जन्म 1719 में पंजाब के सियालकोट (अब पाकिस्तान में) के सम्पन्न और व्यापारी परिवार में पिता भागमल के घर माता गौरां की कोख से इकलौती संतान के रूप में हुआ।

Bal Veer Haqiqat Rai

पिता चाहते थे कि बेटा पढ़-लिख कर अच्छी सरकारी नौकरी करे, परंतु फारसी सीखे बिना ऐसा संभव नहीं था इसलिए पिता ने हकीकत को फारसी सीखने के लिए मदरसे में भेज दिया, जहां वह अपनी तीव्र बुद्धि से सब कुछ ग्रहण कर प्रथम आने लगे। इससे मुस्लिम बच्चे हकीकत से ईर्ष्या करने लगे।

मदरसे में एक दिन मौलवी नहीं थे तो मुस्लिम बच्चों ने हकीकत के सामने मां भगवती को अपशब्द कहे, जिसे सहन करना असम्भव था। हकीकत ने भी कह दिया कि ऐसा ही मैं यदि तुम्हारे धर्म के लिए कहूं तो?

सहपाठियों ने मौलवी जी के आने पर यह बात उन्हें बता दी जिससे मौलवी आग-बबूला हो गए और इस बात को स्यालकोट के मिर्जा बेग की अदालत में ले गए। वहां भी हकीकत ने सही बात बताई जिससे मिर्जा भी नाराज हो गए और उसने शाही मुफ्ती काजी सुलेमान का मशवरा लिया जिसने हकीकत को जान बचाने के लिए मुसलमान होने को कहा परंतु हकीकत के ‘ऐसा नहीं होगा’ कहने पर केस को लाहौर भेज दिया गया।

Bal Veer Haqiqat Rai

वहां भी उन्होंने कहा ‘इस्लामी कानून अनुसार इसकी सजा केवल मौत है या इस्लाम कबूल करना’। इस पर बाल हकीकत ने कहा, ‘‘मुझे है धर्म प्यारा, हंस कर मैं बलिदान हो जाऊं, मुसलमान होने से बेहतर है कि मैं कुर्बान हो जाऊं। यदि मरना ही है तो हिन्दू ही क्यों न मरा जाए।’’ इससे आग-बबूला हो हकीकत राय को मौत की सजा सुनाई गई।

4 फरवरी, 1734 को वसंत पंचमी के दिन जल्लाद ने 14 वर्षीय बाल वीर हकीकत राय का सिर तलवार के एक ही वार में धड़ से अलग कर उन्हें शहीद कर दिया।

Bal Veer Haqiqat Rai

लाहौर के हिंदुओं ने शालीमार बाग के पास उनका अंतिम संस्कार कर दिया और समाधि बना दी। वीर हकीकत के बलिदान का पंजाब के हिंदुओं पर बहुत असर पड़ा। हिन्दू जाग उठा और उन्होंने मुगल शासन की ईंट से ईंट बजा दी।

उधर पति की शहादत की खबर सुनते ही इनकी पत्नी लक्ष्मी देवी, जो उस समय अपने मायके बटाला में थी, ने प्राण त्याग दिए। बटाला में इनकी याद में वहां की सामाजिक संस्था दैनिक प्रार्थना सभा द्वारा एक स्मारक का निर्माण करवाया गया है।

पंजाब सहित देश के अन्य भागों में हर वर्ष वसंत पंचमी को बाल वीर हकीकत का बलिदान दिवस बहुत श्रद्धा से मनाया जाता है। बटाला में इनकी समाधि पर हर वर्ष भारी मेला लगता है और सभी धर्मों के लिए बलिदान होने वाले इस वीर सपूत को याद कर श्रद्धासुमन अर्पित किए जाते हैं।  

Bal Veer Haqiqat Rai

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Content Writer

Niyati Bhandari

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